जमात-ए-इस्लामी के चीफ ने अलजजीरा टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में भारत को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। रहमान ने साल 1971 में बंगाली लोगों के खिलाफ हुए भयानक अत्याचार में अपनी पार्टी के शामिल होने के आरोप को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘जमात ने उस समय जो फैसला लिया था, वह एक राजनीतिक फैसला था। किसी हथियार बंद बल का नहीं। उस समय हमारे नेताओं का मानना था कि भारत की मदद से पाकिस्तान से अलग होने पर बांग्लादेश पर एक नए रूप में भारतीय प्रभुत्व कायम हो जाएगा।’
‘बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी को सपोर्ट करें हिंदू’
रहमान ने कहा कि बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान ने खुद जो युद्ध अपराधियों की लिस्ट तैयार की थी, उसमें सभी पाकिस्तानी सैनिक थे। इसमें कोई भी बांग्लादेश की जमीन का नहीं था। इस बीच जमात-ए-इस्लामी न केवल भारत के प्रति नरम रुख अपना रही है, बल्कि शेख हसीना को अब तक सपोर्ट करने वाले हिंदुओं को भी साध रही है। खुद रहमान ने हिंदुओं से अपील की है कि वे आगामी चुनाव में उनकी पार्टी को सपोर्ट करें। खुलना 1 संसदीय सीट पर एक रैली को संबोधित करते हुए रहमान ने कहा कि वह चाहते हैं कि सभी धर्मों के लोगों के लिए सुरक्षित बांग्लादेश बने।
खुलना 1 संसदीय सीट पर हिंदुओं का बहुमत है। इस सीट के लिए जमात ने अपने स्थानीय हिंदू समिति के अध्यक्ष नांदी को अपना उम्मीदवार चुना है। यहां पर हिंदू उम्मीदवारों के चुने जाने का इतिहास रहा है। नांदी जमात के महासचिव मिआ गोलम के करीबी हैं और उनके साथ अक्सर देखे जाते हैं। जमात चीफ ने उद्योगों से भी कहा है कि वे सभी लोगों को धार्मिक भेदभाव के बिना समान अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि हम प्रत्येक व्यक्ति को न्याय के आधार पर उसका हक देंगे। हम इसमें धर्म नहीं देखेंगे और सही उम्मीदवार पर भरोसा करेंगे।
भारतीय राजनयिक से मिले जमात चीफ
भारतीय राजनयिक से मुलाकात का हाल ही में खुलासा करने वाले रहमान ने कहा, ‘हमने यह कहा है कि यह देश केवल मुस्लिमों का नहीं है। हां, मुस्लिम यहां पर बहुमत में हैं लेकिन यह देश एकता का फूलों का बगीचा है। यहां पर तीन और धर्मों के लोग रहते हैं। हम उनके सम्मान और उनके जीवन रूपी संपत्ति के चौकीदार हैं। उनको कोई भी बुरी नजरों से देख नहीं पाएगा। कोई भी उनको निशाना नहीं बना पाएगा।’ उन्होंने बीएनपी के तारिक रहमान पर भी निशाना साधा और कहा कि परिवार आधारित राजनीति का इस देश से अंत होगा। बीएनपी और जमात दोनों ने ही हिंदुओं की सुरक्षा का वादा किया है। भारत भी मोहम्मद यूनुस सरकार से मांग कर रहा है कि वह हिंदुओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करे। यूनुस सरकार इसमें फेल साबित हो रही है।













