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  • बेलगाम होते नाबालिग, कौन है इसका जिम्मेदार, हमारा लचीला कानून इनके बेखौफ होने की वजह?

    बाली उमर बहकने की होती है… माता-पिता बिजी हो, टीचर अलर्ट न हों और सिस्टम भी सुस्त हो जाए तो ‘कच्ची उम्र’ अपराध के दलदल में फंस सकती है। दरकार है सामाजिक रूप से पिछड़े, आर्थिक रूप से कमजोर और स्कूल ड्रॉप आउट टीनएजर्स को सही राह दिखाने की। पेश है अश्वनी शर्मा की स्पेशल


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    By Azad Hind Desk फरवरी 18, 2026
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    बाली उमर बहकने की होती है… माता-पिता बिजी हो, टीचर अलर्ट न हों और सिस्टम भी सुस्त हो जाए तो ‘कच्ची उम्र’ अपराध के दलदल में फंस सकती है। दरकार है सामाजिक रूप से पिछड़े, आर्थिक रूप से कमजोर और स्कूल ड्रॉप आउट टीनएजर्स को सही राह दिखाने की। पेश है अश्वनी शर्मा की स्पेशल रिपोर्टः

    ऐसे बनती है अपराध की राह

    राजधानी के एक दशक के जुवेनाइल क्राइम डेटा का अनालिसिस करने से पता चलता है कि गरीबी, आसपास के माहौल और गलत संगत की वजह से ज्यादातर नाबालिग अपराध से जुढ़ जाते हैं। पुलिस अफसर बताते हैं, ‘माता-पिता रोजी-रोटी के चक्कर में ध्यान नहीं देते कि बच्चे किसके साथ उठते-बैठते हैं? स्कूल जा भी रहे हैं या नहीं ? उनकी पढ़ाई कैसी चल रही रही है? माता-पिता इंटेस्ट नहीं लेते तो टीचर्स भी लापरवाह हो जाते हैं। नतीजतन अचानक एक दिन बच्चा पढ़ाई छोड़ देता है। नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते है कि राजधानी में 2023 में जुर्म करने वाले 68.50% नाबालिग स्कूल ड्रॉपआउट थे।

    पैरंट्स और टीचर्स समझें जिम्मेदारी

    एक पुलिस अफसर कहते हैं कि कई मामलों में पाया गया है कि आरोपी लड़का लंबे समय से स्कूल नहीं जा रहा था या पढ़ाई छोड़ चुका था। शुरुआती स्तर पर ही स्कूल में बच्चे की गैरहाजिरी पर ध्यान दिया जाता तो उसे जुर्म की राह पर जाने से रोका जा सकता था। स्कूल प्रशासन को देखना चाहिए कि कौन सा बच्चा लगातार स्कूल में अनुपस्थित है। इसकी सूची बनाकर पैरेंट्स को हर हफ्ते स्कूल बुलाएं। जरूरत पड़ने पर बच्चे की काउंसलिंग करवाएं। इससे बच्चे को मेसेज जाएगा कि उस पर नजर रखी जा रही है। मानसिक और भावनात्मक रूप से 12 से 18 साल की उम्र संवेदनशील होती है। इस दौरान सही मार्गदर्शन जरूरी है, वरना भटकाव आ जाएगा।

    कानून लचीला होने से होते हैं बेखौफ

    शुरू में नाबालिग छोटे-मेटे अपराध करता है। कई बार कुछ मामलों में पुलिस भी अनदेखी करती है। अधिकतर मामलों में पुलिस स्टेशन से ही माता-पिता को कस्टडी दे दी जाती है। जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट 2015 के तहत 16 साल से कम उम्र के नाबालिगों को जघन्य अपराध करने के बावजूद सिर्फ तीन साल तक बाल सुधार गृह में रखा जा सकता है। इसी तरह 16 से 15 साल की उम्र तक के नाबालिगें को अधिकतम 21 साल की उम्र तक ही ऑब्जर्वेशन होम में रखना होता है। हालांकि अधिकतर मामलों में आसानी से जमानत मिल जाती है, जिससे वो सुधरने के बजाय अपराध की दुनिया में बने रहते हैं।

    बालिग की तरह चलना चाहिए केस

    NCRB के 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, नाबालिगों के जुर्म में दिल्ली भले ही राज्यों में 5वें पायदान पर हो, लेकिन 19 महानगरों में नंबर एक पर है। राजधानी में जुवेनाइल क्राइम रेट प्रति लाख बच्चों में 41.1 है, जो राष्ट्रीय औसत (7.1) से करीब छह गुना ज्यादा है। देश में पकड़े गए कुल नाबालिगों में से 79 फीसदी 16 से 18 साल की उम्र के बीच वाले थे। पुलिस अफसर कहते हैं कि हत्या या रेप जैसे जुर्म करने वाले आदतन नाबालिगों के खिलाफ जेजे बोर्ड से बालिग की तरह केस चलाने की सिफारिश की जाती है, लेकिन बेहद कम केस में इजाजत मिलती है। एक बार जघन्य अपराध करने पर सुधरने का मौका देना ठीक है, लेकिन बार-बार जुर्म करने वाले नाबालिगों पर सख्ती जरूरी है।

    स्कूल छोड़ने वाले नाबालिग बने सिरदर्द

    NCRB की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में विभिन्न अपराधों में पकड़े गए नाबालिगों में ज्यादातर स्कूल ड्रॉपआउट थे। 3098 में से 290 नाबालिग 10वी पास थे, जबकि 2808 इससे पहले ही स्कूल छोड़ चुके थे।

    काउंसलिंग पड़ी ठप, कौन समझाए ?

    एक साल से ज्यादा वक्त से पीड़ित और आरोपी नाबालिगों की काउंसलिंग के लिए एक्सपर्ट्स ही नहीं है। पुलिस अफसर बताते हैं कि सरकार की ओर से पेमेंट नहीं होने से काउंसलर्स ने काम करना बंद कर दिया है। पॉक्सो में पीड़ित या आरोपियों को ट्रॉमा से बाहर निकालने के लिए काउंसलर ही नहीं हैं। कोर्ट तक कमेंट कर चुका है।

    समाज कल्याण विभाग भी चला रहा अभियान

    दिल्ली सरकार का सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट क्राइम कंट्रोल के मकसद से नश मुक्त भारत अभियान चला रहा है। हेल्पलाइन नंबर 14446 भी जारी किया है। दिल्ली की सभी प्रमुख यूनिवर्सिटी से भी अपील की है कि वे नशा मुक्ति क्लब बनाएं और कैंपस को ‘ड्रग फ्री कैंपस’ घोषित करें। विभाग ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर नशे के हॉटस्पॉट में बीट अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

    नाबालिगों के हाल के मामले

    18 जनवरी 2026, मासूम से गैंगरेप का लगा आरोप
    नॉर्थ ईस्ट जिले के भजनपुरा थाना इलाके में छह साल की मासूम बच्ची से गैंगरेप के मामले में पुलिस ने 10 से 14 साल के तीन लड़कों को पकड़ा।

    15 जनवरी 2026, दोस्ती को लेकर कर दिया मर्डर
    साउथ ईस्ट जिले के जैतपुर में एक लड़की के मामले को लेकर कृष्णा साहू (21) को चाकू से मार दिया गया। दस आरोपियों में पांच नाबालिग निकले।

    15 जनवरी 2026, जापानी पार्क में कर दी हत्या
    रोहिणी के जापानी पार्क में दिव्यांशु (18) का लड़की से दोस्ती को लेकर मर्डर। लड़की का नावालिग भाई समेत पांच आरोपियों को पकड़ा।

    15 जनवरी 2026, जापानी पार्क में कर दी हत्या
    रोहिणी के जापानी पार्क में दिव्यांशु (18) का लड़की से दोस्ती को लेकर मर्डर। लड़की का नावालिग भाई समेत पांच आरोपियों को पकड़ा।

    5 जनवरी 2026, 11वीं के छात्र की ले ली जान
    ईस्ट जिले के मयूर विहार में 11वी के छात्र मोहित (17) पर चाकू से हमला किया, जिनकी अगले दिन मौत हो गई। छह नाबालिग पकड़े गए।

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