• National
  • बैरक में सोनम वांगचुक किस बुरे हाल में रह रहे, पत्नी ने किया चौंकाने वाला दावा; लगाए कई गंभीर आरोप

    नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने एक बार फिर से सरकार और जेल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। गीतांजलि ने जेल के अंदर अपने पति की स्थिति को लेकर भी दर्द जाहिर किया है। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार देते हुए अंदरखाने की कई बात बताई


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 18, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने एक बार फिर से सरकार और जेल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। गीतांजलि ने जेल के अंदर अपने पति की स्थिति को लेकर भी दर्द जाहिर किया है। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार देते हुए अंदरखाने की कई बात बताई हैं। हालांकि, नवभारत टाइम्स इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता है।

    मेरे पति जेल में फर्श पर सो रहे, फर्नीचर तक नहीं दी गई

    पत वांगचुक एक ऐसे बैरक में फर्श पर कंबल ओढ़कर सो रहे हैं जहां कोई फर्नीचर नहीं है। वे किताबें पढ़ रहे हैं, क्योंकि परिवार और वकीलों के अलावा उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है। अंगमो उनके लिए जो अखबार लाती हैं, उसमें से भी उनसे संबंधित खबरें काट दी जाती हैं।

    वांगचुक के खिलाफ रासुका में कोई दम नहीं:गीतांजली

    गीतांजली ने एक और दावा करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के मामले में कोई दम नहीं है इसलिए सरकार अदालत से बार-बार नई तारीख मांग रही है। अंगमो ने समाचार एजेंसी पीटीआई के साथ साक्षात्कार में आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा की गई प्रक्रियात्मक चूक के मद्देनजर वांगचुक को पहले ही जेल से बाहर आ जाना चाहिए था।

    रासुका की धारा 8 का उल्लंघन

    अगमो ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि रासुका के अनुसार, अधिकारियों को हिरासत के आधार स्थापित करने वाले दस्तावेजों सहित सभी दस्तावेज पांच या अधिकतम 10 दिनों के भीतर बंदी को उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने ने दावा किया कि ये चारों वीडियो उन्हें 28वें दिन, यानी 23 अक्टूबर को दिए गए। यह एक बहुत बड़ी प्रक्रियात्मक चूक है, जिसके आधार पर हिरासत आदेश को शुरू से ही अमान्य घोषित किया जाना चाहिए।

    अंगमो ने कहा कि एक तरह से देखा जाए तो, सिर्फ इसी आधार पर यह स्पष्ट मामला है, क्योंकि यह रासुका की धारा 8 का उल्लंघन करता है। इसका परिणाम यह है कि चूंकि उन्हें ये वीडियो नहीं मिले, इसलिए उन्हें सलाहकार बोर्ड के सामने प्रभावी प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला – जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 11 के तहत आता है।

    वांगचुक आशावादी और उम्मीद से भरे हुए

    गीतांजलि अंगमो का कहना है कि वांगचुक आशावादी और उम्मीद से भरे हुए हैं; कैद ने उनके हौसले को कम नहीं किया है। वे वहां के अपने अनुभव पर एक किताब भी लिख रहे हैं। तो, सकारात्मक और उम्मीद से भरे लोगों की एक अच्छी बात यह है कि वे हर चीज को सहजता से स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन जिन परिस्थितियों में वे रह रहे हैं, वे बहुत ही दयनीय और कठिन हैं।

    26 सितंबर को सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था

    मौग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद वांगचुक को 26 सितंबर को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका)के तहत हिरासत में लिया गया था। उनके खिलाफ यह कार्रवाई लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी। उक्त विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र शासित प्रदेश में चार लोग मारे गए और 90 घायल हो गए थे। वांगचुक को जोधपुर की जेल में ले जाया गया था।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।