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  • बॉलीवुड एक्ट्रेस 8 साल की उम्र में ईरान से भागी थीं, बेसमेंट में रहते थे माता-पिता, ऐसे मिलता था एक अंडा एक आलू

    फिल्मी दुनिया में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी में फिल्मों में एंट्री से पहले खूब बदहाली देखी और दर-दर की ठोकरें खाईं। आज हम एक ऐसी ही एक्ट्रेस की बात करने जा रहे हैं जिन्हें रिफ्यूजी कैम्प में अपनी जिंदगी गुजारनी पड़ी थी। वो 8 साल की थीं जब ईरान से भाग


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 7, 2026
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    फिल्मी दुनिया में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी में फिल्मों में एंट्री से पहले खूब बदहाली देखी और दर-दर की ठोकरें खाईं। आज हम एक ऐसी ही एक्ट्रेस की बात करने जा रहे हैं जिन्हें रिफ्यूजी कैम्प में अपनी जिंदगी गुजारनी पड़ी थी। वो 8 साल की थीं जब ईरान से भाग निकली थीं। इस एक्ट्रेस का बचपन इस कदर बदहाली में गुजरा है कि उन्हें एक आलू और एक अंडे के लिए राशन वाली लाइन में खड़े रहना पड़ता था। मजेदार ये है कि उन्हें 7 भाषाएं बोलनी आती है और वो रोबोट प्रोग्राम भी कर सकती हैं।

    यह कहानी है तेहरान की एक लड़की की जो जर्मनी भाग गईं और फिर उन्होंने अपना जीवन नए सिरे से शुरू किया। इस एक्ट्रेस का नाम है एल्नाज नोरौजी, जिन्होंने रेफ्यूजी कैम्प के मुश्किल हालात में जिंदगी बिताई। उन्होंने एक पाकिस्तानी फिल्म से अपनी एक्टिंग करियर की शुरुआत की।

    एल्नाज केवल 8 साल की थीं जब वो जर्मनी चली गईं

    रिपोर्ट के मुताबिक, एल्नाज केवल 8 साल की थीं जब वो जर्मनी चली गईं। वो तब केवल 14 साल की थीं, जब काम करना शुरू किया। हमने इस एक्ट्रेस को ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘तेहरान’ और हाल ही में रिलीज हुई ‘मस्ती 4’ जैसी फिल्मों में देखा है। उनका लुक और अंदाज देख कइयों को ऐसा लगता है कि एल्नाज काफी अमीर परिवार से हैं लेकिन सच इससे बिल्कुल उल्टा है।

    एल्नाज नोरौजी ने कहा- हम अमीर परिवार नहीं थे

    हाल ही में साइरस ब्रोचा के साथ बातचीत में एल्नाज़ ने अपने मुश्किल दौर से गुजरे बचपन की कहानी सुनाई जो कंपा देने वाली थी। उन्होंने उन गुजरे वक्त को याद कर बताया कि कैसे रेफ्यूजी कैम्प में उन्होंने वक्त गुजारा था। उन्होंने इस बातचीत में कहा, ‘लोगों को जैसा लगता है उससे अलग… हम एक अमीर परिवार नहीं थे। हम ईरान में एक बहुत छोटे से घर में रहते थे। मुझे अपना बचपन याद है। मुझे तेहरान बहुत पसंद था। मुझे ये फर्क तब समझ आया जब हम तेहरान से जर्मनी के एक बहुत छोटे शहर में चले गए। पहले तो हम एक रेफ्यूजी कैम्प में थे।’

    एल्नाज और उनका परिवार जर्मनी चले गए

    उन्होंने बताया कि पॉलिटिकल वजहों से एल्नाज और उनका परिवार जर्मनी चले गए। तब वो केवल 8 साल की थीं। ये वो सच है जिसका सामना कई ईरानी परिवार उत्पीड़न और प्रतिबंधों से भागते समय करते हैं, खासकर वे प्रतिबंध जो महिलाओं और कार्यकर्ताओं को प्रभावित करते हैं। परिवार को राजनीतिक शरण मिली हुई थी, क्योंकि जर्मनी ने अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, रोजगार के अवसरों और हाई सैलरी वेतन के माध्यम से स्टैबिलिटी दी थी।

    एल्नाज नोरौजी ने सुनाया रेफ्यूजी कैम्प का किस्सा

    उन्होंने आगे बताया, ‘हम बिना किसी पेपर वर्क के जर्मनी पहुंचे थे। उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए वहां सबकुछ बिल्कुल अलग था। कल्पना कीजिए कि आप मुंबई जैसे हलचल भरे और दौड़ते-भागते शहर में पैदा हुए और पले-बढ़े हों, और अचानक एक ऐसे शहर में आ जाएं जहां शाम 6 बजे तक सब कुछ बंद हो जाता है। मैं, मेरी मां और पिताजी एक बहुत छोटे कमरे में रहते थे। अलग-अलग परिवारों के लिए अलग-अलग कमरे थे, लेकिन केवल एक ही बाथरूम और एक ही रसोईघर था। यह तीन बिस्तरों वाला एक बेहद छोटा कमरा था।’

    रेफ्यूजी कैम्प में खाने के लिए लाइन में लगना पड़ता था

    रेफ्यूजी कैम्प में होनेवाली दिक्कतों को याद कर एल्नाज़ ने कहा, ‘हमें खाने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता था, जहां हमें एक आलू और एक अंडा मिलता था। यही रेफ्यूजी जीवन है। वे हमें नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना देते थे।’

    एल्नाज नोरौजी ने कहा- वहां जर्मन भाषा आनी जरूरी

    इन अनुभवों ने उनके दिल और दिमाग पर एक अजीब छाप छोड़ दी। उन्होंने कहा, ‘मुझे बिना मसाले के आलू और अंडे खाना बहुत पसंद है। भारत में लोग इस बात पर मेरा मजाक उड़ाते हैं, लेकिन इससे मुझे अपने बचपन की याद आती है।’ उन्होंने कहा कि जर्मनी आकर काम शुरू करने के लिए जर्मन भाषा आनी जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘हमें भाषा नहीं आती थी। हमें सारे कागजात पूरे करने पड़े, वकील करने पड़े, यह एक लंबी प्रक्रिया थी। इसमें सालों लग सकते हैं क्योंकि सरकार को आपके मामले को मंजूरी देनी होती है औ वे यह भी जांच करते हैं कि आप वैध रेफ्यूजी हैं या नहीं।

    एल्नाज ने कहा- मेरे माता-पिता तहखाने में रहते थे

    एल्नाज ने अपने परिवार के बारे में बातें करते हुए कहा, ‘जब मैं पैदा हुई थी तब मेरे माता-पिता तहखाने में रहते थे। मैं अमीर परिवार से नहीं हूं। हमें शून्य से शुरुआत करनी पड़ी। हम उन कुछ लोगों में से थे जो कैम्प से जल्दी निकल पाए। कई लोग वहां दो से तीन साल तक रहे। आपको महत्वाकांक्षी भी होना चाहिए क्योंकि वहां जीवन एक तरह से आरामदायक लग सकता है। आपको किसी चीज के लिए भुगतान नहीं करना पड़ता और आपको खाना भी दिया जाता है।’

    एल्नाज नोरौजी ने देवनागरी और उर्दू सीखी

    उन्होंने बताया कि इसके बाद उनका परिवार आखिरकार हनोवर चला गया, जहां एल्नाज की पढ़ाई-लिखाई हुई। उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘जर्मनी ने मुझे समय की पाबंदी सिखाई। भारत में दो मिनट में आएगा वाले रवैये में ढलने में मुझे समय लगा।’ एल्नाज ने बताया कि उन्होंने अपनी मां के साथ जर्मन भाषा सीखी और वहीं अपनी पढ़ाई जारी रखी। वहीं उन्होंने घर पर मैंने देवनागरी और उर्दू सीखी। उन्होंने कहा, ‘मैं भारत आकर एक प्रिविलेज्ड लड़की की तरह नहीं दिखना चाहती थी। मुझे इंडस्ट्री में काम करने के लिए भाषाएं सीखनी पड़ीं। मैं सात भाषाएं बोलती हूं।’

    बचपन से ही एक्ट्रेस बनना चाहती थीं एल्नाज

    एल्नाज़ ने यह भी बताया कि जर्मनी में एजुकेशनल क्वॉलिफिकेशन के आधार पर अलग-अलग स्कूल हैं और उन्हें सबसे होनहार स्टूडेंट माना जाता था। उन्होंने कहा कि उन्हें रोबोट प्रोग्रामिंग भी आती है। उन्होंने जावा का इस्तेमाल बहुत पहले सीखा था। एल्नाज ने फ्रेंच भी सीखी है। एल्नाज पढ़ाई के साथ-साथ बचपन से ही एक्ट्रेस बनना चाहती थीं। उन्होंने कहा, ‘मैंने 14 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की। मैं अक्सर स्कूल नहीं जाती थी लेकिन हमेशा अपना होमवर्क पूरा करके जाती थी। मैं ट्रैवल के दौरान फ्लाइट या ट्रेन में उसे पूरा करती थी।’ उन्होंने बर्लिन फैशन वीक समेत कई बड़े ब्रांड के लिए रैंप वॉक भी किया है।

    एल्नाज ने पाकिस्तानी फिल्म से अपनी एक्टिंग की शुरुआत की

    हालांकि, एल्नाज ने एक पाकिस्तानी फिल्म से अपनी एक्टिंग की शुरुआत की। उन्होंने ‘तेहरान’ (Apple TV+), ‘कंधार’, ‘सेक्रेड गेम्स’ और एक पंजाबी फिल्म ‘खिदो खुंडी’ जैसे इंटरनैशनल और भारतीय प्रोजेक्ट में काम किया। बॉलीवुड में उन्हें नेटफ्लिक्स की ‘सेक्रेड गेम्स’ से पहचान मिली, जिसमें उन्होंने सैफ अली खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों के साथ काम किया।

    ‘मस्ती 4’, ‘तेहरान’, ‘द ट्रेटर्स’ जैसे शो में दिखीं

    वहीं उन्होंने ‘जुग जुग जीयो’, ‘तेहरान’ और ‘मस्ती 4’ जैसी फिल्मों के साथ-साथ ‘मेड इन हेवन’ और करण जौहर के रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स’ जैसी सीरीज़ में भी काम किया है।

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