दक्षिण पूर्व एशिया में चीनी युद्धपोत भी तैनात
चीन ने भी विदेशों में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के प्रयासों के तहत 15 नवंबर से 22 दिसंबर तक गहरे समुद्र में व्यापक ट्रेनिंग के लिए अपने तीन युद्धपोतों को तैनात किया था। इस दौरान चीनी युद्धपोतों ने वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा किया था। चीनी युद्धपोतों ने इन देशों की नौसेनाओं के साथ एक्सपीरियंस भी शेयर किया था और जमीन पर ट्रेनिंग भी की थी। हालांकि, यह युद्धाभ्यास नहीं था।
दक्षिण पूर्व एशिया भारत-चीन के लिए जरूरी क्यों
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया रणनीतिक रूप से पूर्व में चीन और पश्चिम में भारत के बीच स्थित है। इस क्षेत्र में चीन और भारत सैन्य तैनाती, हथियारों की बिक्री और नौसेना की उपस्थिति के जरिए क्षेत्रीय देशों के साथ रक्षा संबंधों को गहरा कर अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। पेंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन फर्स्ट आइलैंड चेन जो चीन और अधिकांश दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सीमा से लगता है – को अपना रणनीतिक केंद्र मानता है।
भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी पर काम तेज
हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पहुंच का मुकाबला करने के लिए भारत भी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के अनुरूप दक्षिण पूर्व एशिया में अपना भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ा रहा है। यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से भारत के प्रभाव वाला माना जाता रहा है, लेकिन पिछले एक दशक में कई देशों ने चीन के साथ संबंधों को मजबूत किया है। ऐसे में भारत दोबारा अपनी खोई हुई जमीन को पाने और शक्ति को संतुलित करने के लिए इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है।
भारतीय नौसेना के फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन को जानें
भारतीय नौसेना का फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन में INS तीर, शार्दुल, सुजाता और ICGS सारथी जहाज शामिल हैं। इस स्क्वाड्रन को अधिकारी प्रशिक्षुओं को “व्यापक परिचालन और क्रॉस-कल्चरल अनुभव” प्रदान करने के लिए तैनात किया जाएगा, जिसमें छह मित्र विदेशी देशों के प्रशिक्षु भी शामिल हैं। युद्धपोतों पर सवार कर्मियों में भारतीय सेना और वायु सेना के सदस्य भी शामिल होंगे, जिसका लक्ष्य तीनों सेनाओं के बीच “सामंजस्य” को और मजबूत करना है।













