SIPRI की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष AI से जेनरेट की गई गलत जानकारी से प्रभावित हुआ था। इसमें आगे कहा गया है कि इसकी वजह से ये संघर्ष, “आसानी से” एक बड़े टकराव में बदल सकता था, जिसमें दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीधे न्यूक्लियर टकराव की संभावना थी।
भारत-पाकिस्तान में परमाणु जंग की आशंका
SIPRI की रिपोर्ट में 2025 के भारत-पाकिस्तान संकट का जिक्र करते हुए रिसर्च पेपर जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम गलत जानकारी ने युद्ध के मैदान की धारणाओं को बिगाड़ दिया।” इसमें कहा गया है, “AI-सक्षम गलत जानकारी आसानी से एक बड़े संघर्ष में बदल सकती थी, जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच सीधा न्यूक्लियर टकराव संभव था।” रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी देते हुए कहा गया है कि भविश्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर, गलत और भ्रम फैलाने वाली जानकारियां, युद्ध के मैदान की वास्तविकताओं से काफी अलग होती हैं, लेकिन इनका प्रभाव ऐसी हो सकती हैं, जो युद्ध के मैदान पर वास्तविक असर डाल सकती हैं और इससे टकराव की आशंका भयानक स्तर पर पहुंच सकती हैं। ऐसे फर्जी अभियान, परमाणु हथियारों वाले देशों की रणनीतिक गणनाओं को बाधित कर सकते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फर्जी सूचनाओं और गलत जानकारियों की बाढ़ पर SIPRI ने अफनी रिपोर्ट में सूचना के माहौल को “सनसनीखेज का कार्निवल” बताया है। इसमें कहा गया है कि आर्टिफिशियल तरीके से जेनरेट किए गए कंटेंट, दोनों तरफ के मेनस्ट्रीम मीडिया आउटलेट्स पर प्रसारित किए गये। उन्हें सैन्य सफलता कहा गया और इस बाबत झूठी कहानियों को जमकर फैलाया गया। हालांकि, SIPRI रिपोर्ट से अलग भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने परमाणु जंग की किसी भी संभावनाओं से इनकार किया है। भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी को कहा कि पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ने अपने भारतीय समकक्ष के साथ टेलीफोन पर बातचीत के दौरान कोई न्यूक्लियर खतरा नहीं उठाया। उन्होंने कहा था कि “जहां तक न्यूक्लियर बयानबाजी का सवाल है, DGMO वार्ता में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। जो भी न्यूक्लियर बयानबाजी की गई, वह पाकिस्तान के राजनेताओं की तरफ से की गई थी।”














