अग्रवाल ने कहा, “हम लगातार बातचीत कर रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि हमारे नेता जब मिलें, उससे पहले हम इस समय-सीमा को पूरा कर सकें।” उन्होंने इस बारे में और विस्तार से नहीं बताया। यूरोपीय संघ का कार्बन टैक्स एक ऐसा मुद्दा है जिस पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है और यह बातचीत में एक बड़ी रुकावट बना हुआ है। कार्बन टैक्स एक ऐसा शुल्क है जो उन उत्पादों पर लगाया जाता है जिनका उत्पादन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रियाओं से होता है।
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कब होगी घोषणा?
अगर सब कुछ ठीक रहा, तो उम्मीद है कि भारत और EU के नेता 27 जनवरी को होने वाले शिखर सम्मेलन में इस समझौते के पूरा होने की घोषणा करेंगे। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर बाद में किए जाएंगे। वाणिज्य सचिव ने कहा, “यह घोषणा करने का एक अच्छा मौका होगा। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं।” यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार को बढ़ावा देगा। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान आसान होगा। साथ ही, यह निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा। इस समझौते से उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद कम कीमतों पर मिल सकते हैं।
वहीं, अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बारे में बात करते हुए अग्रवाल ने कहा कि यह तब घोषित किया जाएगा जब दोनों पक्ष तैयार होंगे। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से मुलाकात की थी। इसके अलावा अधिकारी भी ऑनलाइन माध्यम से लंबित मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। अग्रवाल ने कहा, “यह बहुत करीब है, लेकिन हम कोई समय-सीमा तय नहीं कर सकते क्योंकि यह तब होगा… जब दोनों पक्ष तैयार होंगे और उन्हें लगेगा कि घोषणा करने का यह सही समय है।”












