‘संबोधन में इजरायली पीएम का खुला बचाव’
कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इजरायल की स्थापना के मसले पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और अलबर्ट आइंस्टीन की चिट्ठियों को साझा करते हुए एक्स पर लिखा है, ‘कल नेसेट में अपने संबोधन के दौरान उनके मेजबान (बेंजामिन नेतन्याहू) का खुला बचाव था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि जिस दिन उनका जन्म हुआ,उसी दिन भारत ने इजरायल को नए राष्ट्र के रूप में मान्यता दी।’
नेहरू और अलबर्ट आइंस्टीन की चिट्ठी शेयर किया
जयराम रमेश ने आगे बताया कि ‘असल में 13 जून, 1947 को अल्बर्ट आइंस्टीन ने इजरायल की स्थापना को लेकर जवाहरलाल नेहरू को चिट्ठी लिखी थी। नेहरू ने एक महीने बाद आइंस्टीन को उत्तर दिया। 5 नवंबर, 1949 को दोनों की मुलाकात प्रिंसटन स्थित आइंस्टीन के घर पर हुई। नवंबर 1952 में आइंस्टीन को इजरायल के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया।’
भारत की नैतिक प्रतिष्ठा गिराने का लगाया आरोप
इसके बाद रमेश ने एक और ट्वीट को रिट्वीट करके पीएम मोदी पर जोरदार हमला किया। दरअसल, एक ट्विटर हैंडल से इजरायली ऐक्टिविस्ट के एक आर्टिकल पर टिप्पणी की गई थी, जिसमें पीएम मोदी के संबोधन की आलोचना की गई थी। इसपर जयराम रमेश ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा ‘ईटे मैक एक जाने-माने इजरायली वकील और हिम्मत वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्होंने नेसेट में कल के प्रधानमंत्री के बहुत ज्यादा प्रशंसित (गोदी मीडिया में) भाषण के दिखावे का खुलासा कर दिया है, जिसने भारत की नैतिक प्रतिष्ठा गिरा दी है।’
17 सितंबर, 1950 को दी इजरायल को मान्यता
भारत और इजरायल आज एक मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं। 17 सितंबर, 1950 को ही भारत ने इजरायल को आधिकारिक मान्यता दी थी। लेकिन, दोनों देशों के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध 1992 में स्थापित हुए, जिसके बाद इमिग्रेशन ऑफिस, ट्रेड ऑफिस और कॉन्सुलेट की जगह रेगुलर एंबेसी खोली गई।














