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  • भारत के और करीब आया एक पुराना रक्षा सहयोगी, पूर्वी अफ्रीका में अमेरिका का भी है खास पार्टनर

    नई दिल्ली: केन्या पूर्वी अफ्रीका में भारत का एक पुराना रक्षा सहयोगी है। केन्या अमेरिका का भी एक अहम डिफेंस पार्टनर है, लेकिन बीते वर्षों में यह इस क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण सामरिक और दीर्घ-कालिक रक्षा सगहोगी बनकर उभरा है। 24 से 26 फरवरी (2026) के बीच भारत-केन्या ज्वाइंट डिफेंस कोऑर्डिनेशन कमेटी (JDCC) की


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    By Azad Hind Desk फरवरी 27, 2026
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    नई दिल्ली: केन्या पूर्वी अफ्रीका में भारत का एक पुराना रक्षा सहयोगी है। केन्या अमेरिका का भी एक अहम डिफेंस पार्टनर है, लेकिन बीते वर्षों में यह इस क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण सामरिक और दीर्घ-कालिक रक्षा सगहोगी बनकर उभरा है। 24 से 26 फरवरी (2026) के बीच भारत-केन्या ज्वाइंट डिफेंस कोऑर्डिनेशन कमेटी (JDCC) की चौथी बैठक नैरोबी में हुई है।

    भारतीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के दौरान केन्या डिफेंस फोर्स ने दोनों देशों के बीच रक्षा भागीदारी को और मजबूत और लगातार विस्तार देने पर हामी भरी है। इसके तहत दोनों देश डिफेंस रिसर्च, डेवलपमेंट और प्रोडक्शन में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

    भारत-केन्या में रक्षा सहयोग का रोडमैप तैयार

    भारत और केन्या के बीच अब सिर्फ क्रेता-विक्रेता वाला रिश्ता नहीं रह गया है, दोनों देशों ने अपनी क्षमताओं के सहभागिता के साथ विकास, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर पूरा फोकस देना शुरू किया है। अब भारत और केन्या दोनों ने ही अपने रक्षा सहयोग को पांच साल के एक रोडमैप के साथ और ज्यादा मजबूत और विस्तार देने का फैसला किया है।

    जियोपॉलिटिक्स के तहत रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

    अब भारत के साथ मिलकर केन्या बदलते जियोपॉलिटिक्स की जरूरतों को देखते हुए इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर, साइबर सिक्योरिटी के साथ-साथ मिलिट्री मेडिकल सर्विस में भी आदान-प्रदान कर रहे हैं। जेडीसीसी में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई संयुक्त सचिव (इंचार्ज) अमिताभ प्रसाद और केन्या के डिफेंस फोर्स के असिस्टेंट चीफ मेजर जनरल फ्रेडरिक एल लेयुरिया ने की।

    हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का अहम सहयोगी केन्या

    केन्या को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का खास रक्षा सहयोगी माना जाता है। 2023 में दोनों देशों ने एक दुर्लभ ज्वाइंट विजन स्टेटमेंट ऑन मैरीटाइम कोऑपरेशन जारी किया था, जिसका फोकस ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा में साझा हित था।

    भारत-केन्या में रक्षा सहयोग में कैसे आ रही मजबूती

    • भारत, केन्या को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है कि वह भारतीय रक्षा उपकरण और सेवाओं का इस्तेमाल करे। इसी कड़ी में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और केन्या शिपयार्ड लिमिटेड के बीच जहाज निर्माण, मरम्मत और मेंटेंस के लिए संयुक्त उद्यमों की भी शुरुआत हुई है।
    • भारतीय सशस्त्र सेना भारतीय सैन्य संस्थानों में केन्या डिफेंस फोर्स के जवानों और अफसरों के लिए विस्तृत प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाती है। इनमें इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर, साइबर सिक्योरिटी और मिलिट्री मेडिकल सेवाएं शामिल हैं।
    • भारत ने केन्या को रक्षा सहयोग के तहत कई तरह के रक्षा उपकरण भी उपलब्ध करवाए हैं। मसलन, 2016 में उसे 30 एंबुलेंस दिए गए और अब केन्याई सेना ने भारतीय कंपनियों से ‘वज्र सुपर शॉट’ जैसे टेक्नोलॉजी भी लेने शुरू कर दिए हैं।
    • दोनों देशों की नेवी संयुक्त युद्धाभ्यास में भी शामिल होती रहती है। केन्याई नेवी 25 फरवरी,2026 को संपन्न हुए भारतीय समुद्री क्षेत्र के एक्सरसाइज मिलन 2026 (Exercise MILAN, 2026) का भी हिस्सा बन चुकी है।
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    नई दिल्ली: केन्या पूर्वी अफ्रीका में भारत का एक पुराना रक्षा सहयोगी है। केन्या अमेरिका का भी एक अहम डिफेंस पार्टनर है, लेकिन बीते वर्षों में यह इस क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण सामरिक और दीर्घ-कालिक रक्षा सगहोगी बनकर उभरा है। 24 से 26 फरवरी (2026) के बीच भारत-केन्या ज्वाइंट डिफेंस कोऑर्डिनेशन कमेटी (JDCC) की


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    भारतीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के दौरान केन्या डिफेंस फोर्स ने दोनों देशों के बीच रक्षा भागीदारी को और मजबूत और लगातार विस्तार देने पर हामी भरी है। इसके तहत दोनों देश डिफेंस रिसर्च, डेवलपमेंट और प्रोडक्शन में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।

    भारत-केन्या में रक्षा सहयोग का रोडमैप तैयार

    भारत और केन्या के बीच अब सिर्फ क्रेता-विक्रेता वाला रिश्ता नहीं रह गया है, दोनों देशों ने अपनी क्षमताओं के सहभागिता के साथ विकास, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर पूरा फोकस देना शुरू किया है। अब भारत और केन्या दोनों ने ही अपने रक्षा सहयोग को पांच साल के एक रोडमैप के साथ और ज्यादा मजबूत और विस्तार देने का फैसला किया है।

    जियोपॉलिटिक्स के तहत रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर

    अब भारत के साथ मिलकर केन्या बदलते जियोपॉलिटिक्स की जरूरतों को देखते हुए इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर, साइबर सिक्योरिटी के साथ-साथ मिलिट्री मेडिकल सर्विस में भी आदान-प्रदान कर रहे हैं। जेडीसीसी में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई संयुक्त सचिव (इंचार्ज) अमिताभ प्रसाद और केन्या के डिफेंस फोर्स के असिस्टेंट चीफ मेजर जनरल फ्रेडरिक एल लेयुरिया ने की।

    हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का अहम सहयोगी केन्या

    केन्या को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का खास रक्षा सहयोगी माना जाता है। 2023 में दोनों देशों ने एक दुर्लभ ज्वाइंट विजन स्टेटमेंट ऑन मैरीटाइम कोऑपरेशन जारी किया था, जिसका फोकस ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा में साझा हित था।

    भारत-केन्या में रक्षा सहयोग में कैसे आ रही मजबूती

    • भारत, केन्या को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है कि वह भारतीय रक्षा उपकरण और सेवाओं का इस्तेमाल करे। इसी कड़ी में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और केन्या शिपयार्ड लिमिटेड के बीच जहाज निर्माण, मरम्मत और मेंटेंस के लिए संयुक्त उद्यमों की भी शुरुआत हुई है।
    • भारतीय सशस्त्र सेना भारतीय सैन्य संस्थानों में केन्या डिफेंस फोर्स के जवानों और अफसरों के लिए विस्तृत प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाती है। इनमें इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर, साइबर सिक्योरिटी और मिलिट्री मेडिकल सेवाएं शामिल हैं।
    • भारत ने केन्या को रक्षा सहयोग के तहत कई तरह के रक्षा उपकरण भी उपलब्ध करवाए हैं। मसलन, 2016 में उसे 30 एंबुलेंस दिए गए और अब केन्याई सेना ने भारतीय कंपनियों से ‘वज्र सुपर शॉट’ जैसे टेक्नोलॉजी भी लेने शुरू कर दिए हैं।
    • दोनों देशों की नेवी संयुक्त युद्धाभ्यास में भी शामिल होती रहती है। केन्याई नेवी 25 फरवरी,2026 को संपन्न हुए भारतीय समुद्री क्षेत्र के एक्सरसाइज मिलन 2026 (Exercise MILAN, 2026) का भी हिस्सा बन चुकी है।
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