भारतीय निर्यात के कारण एशिया में चावल की कीमतें लगभग दस साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। इससे अफ्रीका और दूसरे गरीब देशों के उपभोक्ताओं को राहत मिली, क्योंकि उनके लिए चावल खरीदना सस्ता हो गया। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार ने मार्च में निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाईं थी जिसके बाद भारतीय चावल का निर्यात तेजी से बढ़ा। भारत में रेकॉर्ड उत्पादन होने से चावल की सप्लाई अच्छी हो गई थी। इसी वजह से भारत ने 2022 और 2023 में लगाई गई निर्यात पाबंदियों को पूरी तरह से हटा दिया।
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किसने खरीदा चावल?
अधिकारी ने बताया कि 2024 में चावल का निर्यात बढ़कर 21.55 मिलियन मीट्रिक टन हो गया जबकि 2023 में यह 18.05 मिलियन मीट्रिक टन था। साल 2022 में भारत ने रेकॉर्ड 22.3 मिलियन टन चावल निर्यात किया था। 2025 में गैर-बासमती चावल का निर्यात 25% बढ़कर 15.15 मिलियन टन हो गया। वहीं, बासमती चावल का निर्यात 8% बढ़कर रेकॉर्ड 6.4 मिलियन टन तक पहुंच गया। गैर-बासमती चावल की शिपमेंट बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती जैसे देशों में बहुत बढ़ी। वहीं, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन ने प्रीमियम बासमती चावल की खरीद बढ़ाई।
आमतौर पर भारत जितना चावल निर्यात करता है, वह दुनिया के अगले तीन सबसे बड़े निर्यातक देशों थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान के कंबाइंड एक्सपोर्ट से भी ज्यादा होता है। ओलम एग्री इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नितिन गुप्ता ने इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के मौके पर कहा कि भारतीय चावल दूसरे निर्यातक देशों की तुलना में बहुत प्रतिस्पर्धी है। कम कीमतों की वजह से भारत ने अपना खोया हुआ बाजार हिस्सा वापस पा लिया है।












