खलीज टाइम्स के मुताबिक, इसका असर लाखों यात्रियों पर होने की संभावना है। और दुनिया के सबसे व्यस्त इंटरनेशनल एविएशन मार्केट पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स कंपनी, टूरिज्म इकोनॉमिक्स के नए एनालिसिस के मुताबिक, अगले 10 सालों में दोनों देशों के बीच यात्रियों की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर विमानों की संख्या में इजाफा नहीं होता है तो 2035 तक करीब 27 प्रतिशत से ज्यादा यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाएगा। इसका मतलब होगा कि 2026 से 2035 के बीच कुल मिलाकर लगभग 5 करोड़ 45 लाख यात्रियों पर इसका असर होगा।
भारत-UAE की यात्रा में परेशानी की आशंका
खलीज टाइम्स के मुताबिक, दबाव पहले से ही दिखने लगा है। प्रमुख हवाई मार्गों पर लोड फैक्टर 80 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है, जिससे बहुत कम खाली जगह बची है। टूरिज्म इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि मौजूदा शेड्यूल के तहत, उपलब्ध सीटें 2026 तक पूरी तरह भर जाएंगी। अबू धाबी-इंडिया कॉरिडोर सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों मार्गों में से है, जिसमें अगले दशक में अनुमानित 13.2 मिलियन यात्रियों को जगह नहीं मिल पाएगी। खलीज टाइम्स ने बताया है कि भारत का एविएशन बूम इसके पीछे का मुख्य कारण है। भारत में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2010 के 24 प्रतिशत के मुकाबले 2025 में ये आंकड़ा बढ़कर 40 प्रतिशत पार चला गया है। जिससे भारत में करीब 30 करोड़ से ज्यादा आबादी अब विमानों में सफर करने लायक इनकम और पैसा रखते हैं।
इसीलिए भारत में हवाई यात्रा की दर सालामा स्तर पर 7.2 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ने का अनुमान है। जिससे हर साल 2.2 करोड़ नये यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। हालांकि ये आंकड़ा एयरलाइन कंपनियों के लिए शानदार है और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, लेकिन यात्रियों को परेशानी का सामना करना होगा। उन्हें टिकट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी, उन्हें यात्रा के समय कम सुविधाएं मिलेंगी। पीक ट्रेवल टाइम में ये स्थिति और ज्यादा गंभीर होगी, जिससे भारत के मुख्य शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद जैसे शहरों से अबू धाबी और दुबई जाने के लिए ज्यादा किराया चुकाना होगा।













