शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को देश को आर्थिक डिफॉल्ट से दूर ले जाने का क्रेडिट दिया। शहबाज शरीफ ने पिछले साल संविधान संशोधन में आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) नियुक्त किया गया। इस नए पद पर ताजपोशी के साथ मुनीर को सेना की तीनों शाखाओं और न्यूक्लियर कमांड पर पूरा कंट्रोल मिल गया है। इस बदलाव ने नागरिक शासन में सेना की भूमिका को संस्थागत कर दिया है।
असीम मुनीर की जमकर तारीफ
अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने असीम मुनीर के साथ सहयोग को पार्टरनशिप बताकर ये साबित कर दिया कि देश की नागरिक सरकार अब सैन्य कमान के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘मैं बिना किसी हिचकिचाहट के कह रहा हूं और मेरा यकीन करें कि फील्ड मार्शल (असीम मुनीर) साहब की सपोर्ट न होती तो ऐसी कई समस्याएं थीं जो मैं हल नहीं कर सकता था।’
भारत के खिलाफ उगला जहर
शहबाज शरीफ ने आगे कहा कि ये सिविल और मिलिट्री नेतृत्व की ‘जॉइंट पार्टनरशिप’ है, जो देश में पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने इस पार्टरनशिप के कयामत तक चलने की ख्वाहिश जाहिर की तो भारत के खिलाफ जहर उगलने से नहीं चूके। शहबाज ने कहा, ‘मैं उम्मीद करता हूं कि कयामत तक ऐसी पार्टनरशिप चलती रहे तो पाकिस्तान दुनिया के नक्शे पर ऐसा मुल्क होगा कि हिंदुस्तान को दौरे पड़ेंगे कि पाकिस्तान इतना तगड़ा कैसे बन गया।’
पिछले साल मई में भारतीय सशस्त्र बलों के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी सेना की पिटाई के बाद शहबाज शरीफ अपना कोई संबोधन भारत का नाम लिए बिना खत्म नहीं करते हैं। इसके साथ ही शहबाज के संबोधन में असीम मुनीर की अंतहीन और बेवहज तारीफ भी एक पैटर्न बन गई है। यह इस बात का साफ संकेत है कि पाकिस्तान का सिविल नेतृत्व अब मिलिट्री लीडरशिप के अधीन काम कर रहा है।













