मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिकी सेना की एलीट डेल्टा फोर्स ने अभियान चलाया था। इसके लिए डिटेल रिहर्सल किया गया था। अमेरिकी सैनिकों ने मादुरो के सेफ हाउस की हूबहू कॉपी बनाई थी। इसके आधार पर अभ्यास किया गया कि वे कड़ी सुरक्षा वाली जगह में कैसे घुसेंगे।
मादुरो के करीब था CIA एजेंट
रायटर्स ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की एक छोटी टीम अगस्त से ही जमीन पर मौजूद थी। इस टीम ने मादुरो की रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में एक-एक जानकारी जुटाई, जिससे उन्हें पकड़ना आसान हो गया। दो अलग सूत्रों ने कहा कि इंटेलिजेंस एजेंसी के पास मादुरो के करीब एक एजेंट भी था जो उनकी हरकतों पर नजर रखता था और ऑपरेशन शुरू होने पर उनकी सही लोकेशन बताने के लिए तैयार था।
चार दिन पहले ही होने वाला था ऑपरेशन
सभी तैयारियां पूरी होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चार दिन पहले ऑपरेशन को मंजूरी दी। लेकिन सैन्य योजनाकारों ने खराब मौसम का हवाला देते हुए इसे रोकने की सलाह दी। इसके लिए बेहतर मौसम और कम बादलों का इंतजार करने की सलाह दी गई। आखिरकार अमेरिकी समयानुसार शुक्रवार रात को 10.46 बजे ट्रंप ने ऑपरेशन को मंजूरी दी, जिसका नाम ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व रखा गया।
ट्रंप लाइव देख रहे थे पूरा सीन
ट्रंप ने बताया कि वह फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित अपने मार-ए-लागो क्लब में अपने सलाहकारों के साथ ऑपरेशन को लाइव देख रहे थे। मिशन पूरा होने के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज पर कहा, मैंने कुछ बहुत अच्छे काम किए हैं, लेकिन मैंने ऐसा कुछ पहले कभी नहीं देखा।
पेंटागन ने इस ऑपरेशन के लिए बहुत बड़ी तैयारी कर रखी थी। इसके लिए कैरेबियन में एक एयरक्राफ्ट करियर, 11 यद्धपोत और एक दर्जन से ज्यादा F-35 लड़ाकू विमान भेजे थे। ऑपरेशन के काफी पहले से इस इलाके में 15000 से ज्यादा सैनिकों को तैनात किया गया था। हालांकि, इस तैनाती को ड्रग्स विरोधी ऑपरेशन तहत बताया जाता रहा है।













