स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, निर्भीकता और सेवा का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध उद्घोष ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए’ आज भी लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। फिल्म में भी इसी सार को प्रस्तुत किया गया।
मिथुन चक्रवर्ती ने रामकृष्ण परमहंस का किरदार निभाया
उनके जीवन पर आधारित इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती ने रामकृष्ण परमहंस का किरदार निभाया और अपने शानदार एक्टिंग के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। फिल्म में कई बड़े सितारे भी शामिल थे, जो इस महान संत के जीवन को जीवंत करने में सफल रहे।
15 अगस्त 1998 को दूरदर्शन पर इसका प्रीमियर
साल 1998 में आई हिंदी फिल्म स्वामी विवेकानंद का निर्देशन जी.वी. अय्यर ने किया और निर्माण टी. सुब्बारामी रेड्डी ने किया। फिल्म को सही तरह से फिल्माने के लिए पूरी टीम ने खूब मेहनत की थी, निर्देशक को स्क्रिप्ट और शोध में 11 साल लगे थे। फिल्म 12 जून 1998 को रिलीज हुई। 15 अगस्त 1998 को दूरदर्शन पर इसका प्रीमियर हुआ था।
मिथुन चक्रवर्ती स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की भूमिका में
फिल्म में सर्वदमन डी. बनर्जी ने स्वामी विवेकानंद का किरदार निभाया, जबकि मिथुन चक्रवर्ती ने उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की भूमिका में शानदार काम किया था। मिथुन चक्रवर्ती के प्रदर्शन की खूब सराहना हुई और उन्हें अपना तीसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। मिथुन के अलावा, फिल्म में प्रदीप कुमार उनके पिता और तनुजा उनकी मां के किरदार में थे। इसके अलावा, देबाश्री रॉय, मीनाक्षी शेषाद्री, ममूटी, शम्मी कपूर, शशि कपूर, अनुपम खेर, हेमा मालिनी, राखी और जया प्रदा जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
मिथुन के अभिनय को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत कहा
फिल्म स्वामी विवेकानंद में उनके जन्म से लेकर 1897 में पश्चिम से भारत लौटने तक के जीवन को दिखाती है, जिसमें उनके आंतरिक संघर्ष, गुरु भक्ति और शिकागो भाषण जैसे प्रसंग शामिल हैं। फिल्म को क्रिटिक्स से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन मिथुन के अभिनय को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत माना गया। यह फिल्म युवाओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से जोड़ने का बेहतरीन माध्यम है।
उन्होंने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की
12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी विवेकानंद (नरेंद्रनाथ दत्ता) भारत के महान आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक और युवा प्रेरक थे। वह रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे और वेदांत दर्शन तथा योग को पश्चिमी दुनिया में पहुंचाने वाले प्रमुख व्यक्ति माने जाते हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिया गया ऐतिहासिक भाषण है, जहां वह पूरी दुनिया को प्रभावित करने में सफल रहे। उन्होंने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा में सक्रिय हैं।













