कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने शुक्रवार शाम को तीसरी तिमाही के नतीजों के बारे में बताते हुए कहा कि उनका क्विक कॉमर्स बिजनेस अब लगभग हर ऑर्डर पर मुनाफा दे रहा है। इसका मतलब है कि हर ऑर्डर पर होने वाले खर्च से ज्यादा कमाई हो रही है। क्विक कॉमर्स बिजनेस को अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था। वहीं तीन साल पहले शुरू हुआ एफएमसीजी बिजनेस भी अब EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के मामले में मुनाफा कमाने लगा है। हालांकि, उन्होंने इस बिजनेस के बारे में कोई खास वित्तीय आंकड़े नहीं बताए।
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मुनाफे के सबसे बड़े कारण
रिलायंस रिटेल के ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर दिनेश तलूजा ने बताया कि कंपनी के पास भारत का सबसे बड़ा ग्रॉसरी रिटेल बिजनेस है। इस वजह से वे भारत की ज्यादातर एफएमसीजी कंपनियों के लिए सबसे बड़े खरीदार या विक्रेता हैं। उन्होंने बहुत ही कुशल सोर्सिंग (सामान खरीदने का तरीका) विकसित की है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता है। उन्होंने कहा कि यह क्विक कॉमर्स बिजनेस के लिए एक बड़ा फायदा रहा है।
तलूजा ने आगे बताया, ‘दूसरा कारण है कैटेगरी का मिक्स, जिसमें फूड और बेवरेज (F&B) का मार्जिन सबसे ज्यादा होता है। हमारे क्विक कॉमर्स बिजनेस में हर तीन में से एक ऑर्डर F&B का होता है, जो हमारे लिए मार्जिन बढ़ाने वाला है। F&B में बर्बादी भी बहुत ज्यादा होती है। किराना दुकानों के लिए यह 30-35% तक हो सकती है, लेकिन हमने इसे कंट्रोल किया है। इसलिए, हम ग्राहकों को अच्छी कीमतें दे पाते हैं और फिर भी अच्छा मुनाफा बनाए रखते हैं।’
क्विक कॉमर्स में बढ़त
कंपनी के क्विक कॉमर्स से जुड़े कुल 3,000 आउटलेट्स में से, जिनमें उनके ग्रोसरी स्टोर भी शामिल हैं। करीब 800 डार्क स्टोर हैं। इनका इस्तेमाल सिर्फ डिलीवरी के लिए होता है। तलूजा ने कहा, ‘क्विक कॉमर्स हमारे लिए सिर्फ ग्रोसरी ही नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन भी इसमें शामिल हैं, जो काफी अच्छा कर रहे हैं। हम ग्राहक की जेब से ज्यादा से ज्यादा पैसा निकालना चाहते हैं। अभी हम अपने कुल मुनाफे में हर ऑर्डर पर कुछ रुपये का मार्जिन जोड़ रहे हैं।’
दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही में कंपनी के क्विक कॉमर्स बिजनेस में हर दिन औसतन 16 लाख ऑर्डर थे। रिलायंस रिटेल ने बताया कि वे भारत के दूसरे सबसे बड़े क्विक कॉमर्स प्लेयर बनने की राह पर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि औसत दैनिक ऑर्डरों में तिमाही-दर-तिमाही 53% की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने कहा कि वे नेटवर्क में और डार्क स्टोर जोड़ते रहेंगे ताकि हर ऑर्डर की औसत दूरी कम हो सके।
अन्य कंपनियों की क्या स्थिति?
ब्लिंकिट और स्विगी अभी भी कुल मिलाकर मुनाफा नहीं कमा रहे हैं। ब्लिंकिट ने सितंबर तिमाही में नुकसान में कमी बताई थी, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 156 करोड़ रुपये थी। वहीं स्विगी ने बताया कि सितंबर तिमाही में उनके क्विक कॉमर्स बिजनेस के कंट्रीब्यूशन लॉस में 30% की कमी आई थी, जो 181 करोड़ रुपये था।














