इसकी विचारधारा अरब और मुस्लिम दुनिया में लोकप्रिय और विवादित दोनों रही है। हालांकि मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं का दावा रहा है कि उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है, लेकिन अभी भी मुस्लिम ब्रदरहुड कई तरह की मजहबी हिंसा में शामिल रहा है। इस विचारधारा को मानने वाले लोग भी दुनिया के कई देशों में हिंसक वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। मुस्लिम ब्रदरहुड का दावा है कि वो अब चुनाव और अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से इस्लामी शासन स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन इस ग्रुप के कई शाखाओं के पास हथियारबंद लड़ाके हैं। आलोचक इस संगठन को बहुत बड़ा खतरा मानते रहे हैं। अमेरिका के इस फैसले का संयुक्त अरब अमीरात ने स्वागत किया है, जबकि तुर्की के लिए ये एक बड़ा झटका है, क्योंकि राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन इस विचारधारा के समर्थक माने जाते हैं।
मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है , इसका मकसद क्या है?
अमेरिका ने 13 जनवरी को मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है, जिसका प्रभाव काफी ज्यादा होने वाला है। मुस्लिम ब्रदरहुड, अरब देशों में फैला एक कट्टर इस्लामिक मूवमेंट है और स्कूल टीचर से मजहबी नेता बने हसन अल-बन्ना ने इसकी स्थापना की थी। उनका मानना था कि इस्लामी विचारधारा ही शासन का आधार होनी चाहिए। शुरूआती दिनों में इसने सामाजिक आंदोलनों पर काम किया और फिर धीरे धीरे इसने इस्लाम के नाम पर हिंसा फैलाना शुरू कर दिया। इसके एक हथियारबंद समूह ने ब्रिटिश उपनिवेशवादियों और इजरायल के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 1948 में मिस्र के प्रधानमंत्री महमूद फहमी अल-नोकराशी की हत्या में भी इसी संगठन का हाथ था। क्योंकि उन्होंने इस संगठन को गैर कानून घोषित कर दिया था। अल-बन्ना की काहिरा में हत्या कर दी गई।
मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है, उत्थान और पतन
- डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित किया
- 1928 में मिस्र में हसन अल-बन्ना ने मु्स्लिम ब्रदरहुड की स्थापना की
- दुनिया के सबसे प्रभावशाली सुन्नी इस्लामी संगठनों में से एक है मुस्लिम ब्रदरहुड
- मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा ‘इस्लाम ही समाधान’ है।
- 2011 के अरब स्प्रिंग के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी ने मिस्र में चुनाव जीता
- मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद मुर्सी 2012 में राष्ट्रपति बने
- 2013 में मोहम्मद मुर्सी को सेना ने सत्ता से हटा दिया, नेताओं को जेल में डाल दिया
- मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र, जॉर्डन, लीबिया समेत कई देशों में फैला हुआ है।
- सऊदी अरब, मिस्र, UAE समेत कई देशों ने लगा रखा है बैन
1952 में मिस्र में सैन्य तख्तपलट किया गया और मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल-नासर की हत्या कर दी गई। ये इल्जाम भी मुस्लिम ब्रदरहुड पर ही लगा। इसके बाद ब्रदरहुड के जाने-माने विचारक सय्यद कुत्ब को फांसी दे दी और हजारों दूसरे सदस्यों को जेल में डाल दिया। इसके बाद 1970 के दशक में ये संगठन एक बार फिर से मिस्र में उभरा। उस वक्त मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात थे। उन्होंने वामपंथियों को कंट्रोल करने के लिए इस संगठन से समझौता कर लिया।
मुस्लिम ब्रदरहुड का उभार और पतन
होस्नी मुबारक, जो एक तानाशाह माने जाते थे, उन्होंने अपने 30 सालों के शासनकाल के दौरान इस संगठन पर सख्ती से बैन लगा रखा था। लेकिन 2005 तक मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का सबसे मजबूत विपक्षी ग्रुप बन गया और उसने संसद में पांच में से एक सीट भी जीती। 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान होस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल कर दिया गया और फिर मुस्लिम ब्रदरहुड सत्ता में आ गया। लेकिन वो ज्यादा दिनों तक देश नहीं चला गया। ब्रदरहुड के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के बंटवारे वाले शासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गया और फिर मिस्र की सेना ने 2013 में इस ग्रुप को सत्ता से हटा दिया। एक क्रूर और खूनी कार्रवाई के दौरान इस संगठन को बुरी तरह से कुचल दिया गया।
मिस्र ने इसके बाद इस संगठन को गैर कानूनी कर एक आतंकवादी ग्रुप घोषित कर दिया। मिस्र के मौजूदा राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सिसी ने भी मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों और उससे संबंध या सहानुभूति रखने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। हजारों लोगों को जेल में डाला गया है। ब्रदरहुड के मुख्य नेता मोहम्मद बदी मिस्र की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इस ग्रुप के लगभग सभी सीनियर नेताओं को जेल में डाल दिया गया है या वे देश से बाहर रह रहे हैं।
किन किन देशों में फैला है मुस्लिम ब्रदरहुड?
मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा से इत्तेफाक रहने वाले लोग दुनिया के हर हिस्से में मौजूद हैं। लेकिन ज्यादातर कानूनी कार्रवाई के डर से चुप रहते हैं या मौके का इंतजार कर रहे हैं। लेबनान में इसकी शाखा (अल-जमा अल-इस्लामिया) को एक विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) के रूप में नामित किया गया है। मिस्र और जॉर्डन की शाखाओं को हमास को मदद देने के लिए विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) के रूप में नामित किया गया है। मिस्र, सऊदी अरब, UAE और रूस जैसे देशों ने भी इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है।














