Jio AI करेगा भारतीय भाषाओं में काम
मुकेश अंबानी ने बताया कि जियो AI, भारतीय भाषाओं में काम करेगा, ताकि किसान, युवा, छात्र और छोटे बिजनेसमैन अपनी भाषा में एआई को इस्तेमाल कर पाएं। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने एजुकेशन के लिए जियो शिक्षा AI, स्वास्थ्य के लिए जियो आरोग्य AI, कृषि के लिए जियो कृषि और आम उपयोग के लिए जियो भारत IQ जैसे प्लेटफॉर्म पेश किए हैं, जो स्थानीय भाषाओं में AI बेस्ड सॉल्यूशंस उपलब्ध कराएंगे।
AI-रेडी डेटा सेंटर पार्क
मुकेश अंबानी ने बताया कि कंपनी जामनगर में चरणबद्ध तरीके से मल्टी-गीगावॉट AI-रेडी डेटा सेंटर पार्क डेवलप कर रही है। 2026 के आखिर तक 120 मेगावॉट क्षमता के साथ इसे शुरू करने का लक्ष्य है, जिसे आगे गीगावॉट स्तर तक बढ़ाया जाएगा। यह पूरा ढांचा ग्रीन एनर्जी पर आधारित होगा। साथ ही, जियो अपने नेटवर्क के जरिए देशभर में ऐसी कंप्यूट क्षमता उपलब्ध कराएगी, जिससे AI सेवाओं को कम लागत और तेज स्पीड से लोगों, दुकानों, स्कूलों, अस्पतालों और खेतों तक पहुंचया जा सके।
21वीं सदी की AI पावर बन सकता है भारत
मुकेश अंबानी ने भरोसा जताया कि भारत 21वीं सदी में अग्रणी AI पावर बन सकता है, बशर्ते तकनीक सुलभ, किफायती और देश की जरूरतों के अनुरूप डेवलप की जाए। जियो की इन घोषणाओं से संकेत मिलता है कि कनेक्टिविटी के बाद अब कंपनी AI को अगला राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। AI से जुड़ी चिंताओं पर उन्होंने कहा कि एआई वह मंत्र है जो हर डिवाइस को तेज, बेहतर और स्मार्ट तरीके से काम करने की शक्ति देता है। मैं AI को आधुनिक अक्षय पात्र के रूप में देखता हूं, जो अंतहीन पोषण प्रदान कर सकता है। AI नौकरियां नहीं छीनेगा बल्कि, यह हाई-स्किल वाले कामों में नए अवसर पैदा करेगा।
अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि AI-बेस्ड विकास की यह पहल, भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल भारत, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बन सकती है।













