कोर्ट ने राजपाल यादव से कहा कि सरेंडर के बाद कोर्ट इस बात की जांच करेगी कि कोई राहत दी जा सकती है या नहीं। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राजपाल यादव को पहले जो बार-बार सरेंडर से राहत दी गई थी वह उनके द्वारा दिए गए आश्वासनों के आधार पर दी गई थी कि विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया जाएगा, और शिकायतकर्ता कंपनी को उसके पैसों का भुगतान कर दिया जाएगा। पर ऐसा नहीं हो पाया। कोर्ट ने बताया कि अभी 9 करोड़ रुपये बकाया हैं।
राजपाल यादव ने बार-बार नियम तोड़े और इसलिए उन्हें दी गई राहत वापस ले ली गई। कोर्ट ने बताया कि कई बार तारीखें तय की गईं ताकि बकाया राशि का भुगतान किया जा सके, पर ऐसा नहीं हुआ। यहां तक कि निर्धारित समय सीमा के भीतर डिमांड ड्राफ्ट और किश्तों के जरिए जिन रुपयों का भुगतान किया जाना था, वो भी नहीं किया गया। इसके लिए डिमांड ड्राफ्ट में तकनीकी और टाइपिंग गलती की बात कही गई, पर कोर्ट ने इस बहाने को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि यह दलील भरोसे के लायक नहीं।
हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में पहले ही सजा सुनाई थी, पर उसे जून 2024 में रोक दिया गया था ताकि एक्टर को आपस में मामला सुलझाने के लिए समय मिल सके, लेकिन तय समय सीमा के भीतर भी विवाद नहीं सुलझ पाया और राजपाल यादव बकाया रुपयों का भुगतान नहीं कर सके। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने के लिए कहा था। 4 फरवरी को सरेंडर के आदेश के बाद राजपाल यादव ने गुरुवार को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया। हालांकि, एक आखिरी बार उन्होंने हाई कोर्ट से इस मामले में राहत देने की गुजारिश की थी। लेकिन हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया।













