बता दें कि 5 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से एक्टर राजपाल को तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा है। सरेंडर करने से पहले मायूस एक्टर ने अधिकारियों से कहा, ‘सर, क्या करूं? मेरे पास पैसे नहीं हैं। कोई और रास्ता नहीं दिख रहा, यहां सब अकेले हैं, कोई दोस्त नहीं होता। इस मुश्किल से मुझे खुद ही गुजरना होगा।’ इस वक्त एक्टर के लिए सोनू सूद और तेजप्रताप यादव ने मदद का हाथ बढ़ाया है और हो सकता है कि वो जल्द ही इस मुसीबत से बाहर आ जाएं।
मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए का कर्ज
खैर, यहां सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि राजपाल यादव को जेल की सजा हईु क्यों है। दरअसल राजपाल यादव इस वक्त साल 2010 के चेक बाउंस मामले में फंसे हैं। पूरा मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने डायरेक्शन में उतरने का फैसला लिया और अपनी पहली फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनाने के लिए उन्होंने बड़ा लोन लिया। बताया जाता है कि मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए का उन्होंने कर्ज लिया था। हालांकि, फिल्म जैसे-तैसे बनी लेकिन इस तरह पिटी कि वो कर्ज आज तक चुका न पाए। कंपनी ने एक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
राजपाल यादव 2013 में ‘धोखाधड़ी’ के आरोप में 4 दिन भुगत चुके हैं जेल
कर्ज के इसी मामले से जुड़े एक अन्य ‘धोखाधड़ी’ में राजपाल यादव को 10 दिनों की जेल की सजा सुनाई गई थी। तब वह 4 दिन जेल में रहे थे। बात साल 2013 की है। 2 दिसंबर 2013 को राजपाल यादव ने कोर्ट ने एक हलफनामा फाइल किया। अदालत ने इस एफिडेविट पर एतराज जताया, क्योंकि इसमें गलत जानकारी दी गई थी और कथित तौर पर उनकी पत्नी के जाली साइन थे। यह 2010 में राजपाल और उनकी पत्नी राधा द्वारा दिल्ली के बिजनेसमैन एम जी अग्रवाल से लिए उसी लोन से जुड़ा है, जो उन्होंने अब तक नहीं चुकाया है।
5 करोड़ और भी लिया था कर्ज
यहां ये भी बताना चाहेंगे कि राजपाल यादव ने केवल मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ का कर्ज नहीं बल्कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के आउटलेट (मुंबई) से भी 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। बैंक से जुड़ा ये मामला साल 2012 का बताया जा रहा है और ये उसी साल की बात है जब फिल्म ‘अता पता लापता’ रिलीज हुई थी। खबर ये भी थी कि ये मामला भी एक्टर की इसी फिल्म से जुड़ा है। इस फिल्म को राजपाल ने खुद डायरेक्ट किया था और उनकी पत्नी राधा यादव इसकी प्रड्यूसर थीं।
बैंक को पैसे न चुका पाने के कारण 3 महीने की जेल
फिल्म फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव न मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के पैसे दे सके और न ही वो सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पैसे लौटा सके। जहां मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने एक्टर पर केस कर दिया था वहीं बैंक को किश्त न दे पाने के अपराध में उन्हें साल 2018 में तीन महीने के लिए जेल की सजा भी हुई थी।
जेल में क्या काम करते थे राजपाल यादव
एक्टर ने जेल में अपने अनुभवों पर एक बार बातें करते हुए बताया भी था कि वो वहां क्या करते थे। यूट्यूबर सिद्धार्थ कन्नन से बातचीत में उन्होंने कहा था, ‘मैं जब जेल में था तब मैं सभी दिन की मंडली को इकट्ठा करता था। मैंने स्पेशल परमिशन ले रखी थी। मैं जेल में वर्कशॉप में खो गया था। मेरी वर्कशॉप की वजह से जिन लोगों की जिंदगी में कुछ भी करने की कोई इच्छा नहीं थी, वे स्माइल करते रहे थे। जिन लोगों की जिंदगी में कोई इच्छा नहीं थी, उन्होंने एक्टिंग शुरू कर दी थी।’
पिता के नाम की जमीन और घर के नाम पर लिया था लोन
इस फिल्म को बनाने में राजपाल ने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। इस फिल्म के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मुंबई की बांद्रा ब्रांच से एक्टर ने 5 करोड़ का लोन लिया था। इस कर्ज के बदले उन्होंने अपने पिता के नाम की जमीन और घर को गारंटी के तौर पर बंधक बनाया था। साल 2024 में सेंट्रल बैंक अधिकारियों ने अपने दिए कर्ज की रिकवरी के लिए राजपाल यादव के होम टाउन पहुंचे थे। लोन न चुका पाने के कारण शाहजहांपुर में मौजूद उनकी करोड़ो की संपत्ति सेठ एनक्लेव को बैंक ने कुर्क कर ली थी।
राजपाल की सम्पत्ति पर बैंक ने लगाया अपना बैनर
खबर आई थी कि टीम ने काफी गोपनीय तरीके से राजपाल की प्रॉपर्टी पर बैंक का बैनर लगा दिया जिसपर लिखा है कि यह संपत्ति सेंट्रल बैंक आफ इंडिया मुंबई की है और इस पर किसी तरह का कोई भी खरीद फरोख्त ना की जाए।
जारी किए सभी 7 चेक बाउंस
राजपाल यादव और उनकी पत्नी के खिलाफ मामले में शिकायतकर्ता कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने आरोप लगाया था कि यादव ने 2010 में फिल्म ‘अता पता लपाता’ के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये कर्ज के बदले 8 करोड़ रुपये चुकाने का वादा किया था , लेकिन ऐसा करने में विफल रहे। कंपनी ने आगे कहा कि निपटान राशि को संशोधित करके 7 करोड़ रुपये कर दिया गया था लेकिन इस मामले में जारी किए सभी 7 चेक बाउंस हो गए।
75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए थे
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने 2 फरवरी के आदेश में कथित तौर पर कहा कि यादव को अपने खिलाफ सातों मामलों में से प्रत्येक में 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि जेल की सजा की निलंबन अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद, राजपाल यादव ने शिकायतकर्ता कंपनी मु को राशि चुकाने के अपने वादे का बार-बार उल्लंघन किया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि अक्टूबर 2025 में रजिस्ट्रार जनरल के पास 75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए थे और 9 करोड़ रुपये की राशि देय थी।
राजपाल यादव मामले में कब क्या हुआ, टाइमलाइन
- 2013: कोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन की कैद की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने 3 दिसंबर 2013 से 6 दिसंबर 2013 तक चार दिन जेल में बिताए
- 2018: इसी साल अप्रैल में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को चेक बाउंस मामलों में प धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया। दंपति को छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई।
- नवंबर 2018: दिल्ली हाई कोर्ट ने तीन महीने की जेल की सजा सुनाई
- 2019: जनवरी 2019 में एक सेशन कोर्ट ने मजिस्ट्रेट न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। बाद में, राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा ने सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं।
- 2024: जून में, दिल्ली हाई कोर्ट ने दंपति को दी गई छह महीने की सजा को यह देखते हुए निलंबित कर दिया कि वे कोई कुख्यात अपराधी नहीं थे। तब से, निलंबन को समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है।
- 2025: पिछले साल दिसंबर में, राजपाल यादव के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया था कि 40 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट तैयार कर लिए गए हैं और बकाया 2.10 करोड़ रुपये की राशि 19 जनवरी, 2026 तक चुका दी जाएगी।
- 4 फरवरी, 2026: दिल्ली हाई कोर्ट ने जेल में आत्मसमर्पण की अवधि को और बढ़ाने से इनकार कर दिया और राजपाल यादव को उसी दिन शाम 4 बजे तक जेल सुप्रीन्टेंडेंट को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।
- 5 फरवरी, 2026: अपने पूर्व रुख पर कायम रहते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने आत्मसमर्पण करने के अपने निर्देश को वापस लेने से इनकार कर दिया और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने यह भी टिप्पणी की कि एक्टर का एक दिन पहले सरेंडर न करना कानून के प्रति अनादर दर्शाता है।














