गौतम वासुदेव मेनन की पहली डायरेक्टेड फिल्म ‘मिन्नाले’ में रीमा सेन के साथ आर माधवन और अब्बास थे, ये वैलेंटाइन सीजन की ब्लॉकबस्टर साबित हुई। संगीतकार हैरिस जयराज का संगीत आज भी सराहा जाता है, और रीमा का किरदार तमिल सिनेमा के फैंस की यादों में बसा हुआ है। माधवन के साथ उनकी केमिस्ट्री और उनकी एक्टिंग ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।
कहां गायब हो गई ‘वासेपुर’ की ‘दुर्गा’
अगर कोई एक गाना है जो रीमा सेन की लोकप्रियता का पर्याय बन गया, तो वह फिल्म ‘मिन्नाले’ का ‘वासीगारा’ है। हैरिस जयराज का संगीत और बॉम्बे जयश्री द्वारा गाया गया यह रोमांटिक गाना तुरंत ही क्लासिक बन गया। कॉलेज के रोमांस के बैकग्राउंड में रीमा और माधवन को दिखाने वाले सीन्स ने हर पीढ़ी के दिलों को छू लिया।
‘वासीगारा’ गर्ल के नाम से हैं फेमस
आज भी, 25 साल बाद, ‘वासीगारा’ रोमांटिक गानों की पसंदीदा लिस्ट में शामिल है। रीमा ने जिस सरल ढंग से उस गाने में किरदार निभाया, उनके हाव-भाव, उनकी मुस्कान, उनकी प्रेजेंस—ये सब यादगार बन गए। यह सिर्फ एक गाना नहीं था; यह एक सबसे अलग पल जिसने 2000 के दशक के शुरुआती दौर के तमिल सिनेमा के रोमांस को परिभाषित किया। कई लोगों के लिए, रीमा सेन के लिए कहा कि वो हमेशा ‘वासीगारा’ का चेहरा रहेंगी।
रीमा सेन की फिल्में
- इसके बाद, रीमा ने तमिल और तेलुगू सिनेमा के कुछ बड़े नामों के साथ काम किया। उन्होंने ‘वल्लवन’ में सिलंबरासन के साथ अभिनय किया।
- ‘थिमिरु’ में अपनी जबरदस्त एक्टिंग दिखाई और सेल्वाराघवन की ऐतिहासिक महाकाव्य फिल्म ‘आयिरथिल ओरुवन’ में एक दमदार निगेटिव रोल से दर्शकों को चौंका दिया।
- तेलुगू सिनेमा में, ‘मनसंथा नुव्वे’ और ‘भागीरथा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक भरोसेमंद लीड एक्ट्रेस के तौर पर बनाया।
- उनका काम भारतीय सिनेमा से परे भी फैला हुआ था। रीमा ने हिंदी फिल्मों में भी काम किया, जिनमें अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ (2012) थी, जो उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई।
रीमा सेन की शादी और बच्चा
अपने करियर के शिखर पर, रीमा सेन ने एक अलग राह चुनी। 2012 में, उन्होंने एक निजी समारोह में बिजनेसमैन शिव करण सिंह से शादी की। अगले ही साल, फरवरी 2013 में उनके बेटे रुद्रवीर सिंह का जन्म हुआ। जैसे दूसरी हीरोइनों ने मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, वहीं रीमा ने फिल्मों से लगभग पूरी तरह से दूरी बना ली। बिना कुछ कहे, वो चुपचाप फिल्मों से दूर हो गईं।
परिवार को प्रायोरिटी दी, छोड़ दी इंडस्ट्री
उन्होंने बस अपने परिवार को प्राथमिकता दी और अपने फिल्मी करियर को पीछे छोड़ दिया। आज रीमा सेन मीडिया की चकाचौंध से दूर एक शांत जीवन जी रही हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी बहुत कम है और वे सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई देती हैं। फिल्म जगत के करीबी लोगों का कहना है कि वे अपने इस फैसले से संतुष्ट हैं और बच्चे की देखभाल में पूरी तरह व्यस्त हैं।
अलग तरह की इमेज को रिप्रेजेंट किया
कभी-कभी उनका नाम तब सामने आता है जब उनकी पुरानी फिल्में दोबारा रिलीज होती हैं या जब फैंस 2000 के दशक के शुरुआती दौर के सुनहरे सिनेमा को याद करते हैं। भले ही रीमा सेन ने सिनेमा जगत से दूरी बना ली हो, लेकिन तमिल और तेलुगू फिल्मों में उनका योगदान बना हुआ है। उन्होंने 2000 के दशक के शुरुआती दौर में एक खास तरह की हीरोइन को रिप्रेजेंट किया, जो सिंपल और शांत थी, वो भी बिना दिखावटी ग्लैमर के। ऐसे दौर में जब बड़े-बड़े किरदारों और भव्य स्टार इमेज का बोलबाला था, तब वे ताजगी भरी और रियल थीं।














