T-90MS टैंक के निर्माण में मदद को रूस तैयार
डिफेंस मिरर के मुताबिक, 17 फरवरी को रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने कहा कि वह पहले से ही T-90 वेरिएंट बना रही मौजूदा फैसिलिटी में T-90MS का प्रोडक्शन शुरू करने में भारत की मदद करने के लिए तैयार है। 2019 में, भारत ने “मेक इन इंडिया” इनिशिएटिव के तहत 464 T-90MS टैंकों के लाइसेंस-प्रोडक्शन के लिए 2.8 बिलियन डॉलर का एग्रीमेंट किया था।
T-90MS टैंक की खासियतें जानें
T-90MS टैंक में 125 मिमी की स्मूथबोर गन लगी है, जो पांच किलोमीटर तक गाइडेड मिसाइल दाग सकती है। इसे एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर और कलिना फायर-कंट्रोल सिस्टम का सपोर्ट मिला है। T-90MS टैंक में 1,130-हॉर्सपावर का V-92S2F डीजल इंजन लगा है। इस टैंक की अनुमानित रेंज 550 किलोमीटर है और टॉप स्पीड 60 से 72 किमी/प्रति घंटा के बीच है। T-90MS टैंक को तीन लोगों का क्रू ऑपरेट करता है। इसमें एक ऑटोमेटेड लोडर लगा हुआ है।
T-90MS टैंक पहले से ज्यादा सुरक्षित
T-90MS टैंकों में ब्लोआउट पैनल के साथ रीडिजाइन किया गया एम्युनिशन स्टोरेज लगा हुआ है, जो टैंक की सुरक्षा को बढ़ाता है। यह टैंक मौजूदा टी-90 भीष्म की जगह ले सकता है, जो भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक है। भारत ने टी-90 भीष्म को 2020 में चीन के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद लद्दाख के अग्रिम इलाकों में तैनात किया था। टी-90 भीष्म को भारतीय सेना का रीढ़ माना जाता है।















