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  • रूस ने दोस्त भारत को दिया धोखा? यूक्रेन में दागी निर्यात के लिए बनाई S-400 मिसाइल, दिल्ली को कर सकता है नाराज

    मॉस्को: रूस ने कथित तौर पर भारत के लिए बनाए गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है। रूसी मिसाइलों के मलबे में S-300PMU2 और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 48N6E2 मिसाइल देखी गई है। यह पहली बार है, जब इन मिसाइलों के एक्सपोर्ट वेरिएंट के यूक्रेन में इस्तेमाल


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    By Azad Hind Desk जनवरी 25, 2026
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    मॉस्को: रूस ने कथित तौर पर भारत के लिए बनाए गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है। रूसी मिसाइलों के मलबे में S-300PMU2 और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 48N6E2 मिसाइल देखी गई है। यह पहली बार है, जब इन मिसाइलों के एक्सपोर्ट वेरिएंट के यूक्रेन में इस्तेमाल की बात सामने आई है। मिसाइल के टुकड़ों पर मिले पहचान नंबर से पता चलता है कि यह 48N6E2 है। इस नंबर में ‘E’ का मतलब एक्सपोर्ट वर्जन है। यानी इसे दूसरे देश को बेचने के लिए बनाया गया था।

    डिफेंस एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले की गई रिपोर्ट में दावा किया है कि S-400 एयर डिफेंस सिस्टम एक्सपोर्ट वर्जन में 48N6E, 48N6E2, 48N6E3, 9M96E, 9M96E2, 40N6E मिसाइलों का इस्तेमाल करता है। वहीं घरेलू स्तर पर 48N6, 48N6M, 48N6DM, 9M96, 9M96M, और 40N6 मिसाइलों का इस्तेमाल होता है। ये इंडेक्स एक्सपोर्ट और घरेलू वर्जन को बताते हैं। हालांकि इन मिसाइलों के बेसिक पैरामीटर एक जैसे हैं।

    मिसाइल के टुकड़ों से खुलासा!

    रूसी मिसाइल के मलबे से मिले टुकड़े कथित तौर पर 48N6E2 के हैं, जो 48N6M का एक्सपोर्ट वर्जन है। इसकी 200 km की घोषित रेंज है। रूस मिसाइल के एक्सपोर्ट वेरिएंट के इस्तेमाल की बात नहीं कहता है। ऐसे में एक्सपोर्ट के लिए बनी मिसाइलों की तैनाती रूस के पास स्टैंडर्ड गोला-बारूद की कमी का संकेत देता है। साथ ही रूस की एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने की क्षमता पर भी सवाल उठता है।

    48N6E2 मिसाइल एक्सपोर्ट एग्रीमेंट के तहत बनी है लेकिन एक्सपोर्ट करने के बजाय इसे रूसी सेनाओं ने इस्तेमाल किया। इस मिसाइल का इस्तेमाल सिर्फ S-400 और S-300PMU2 सिस्टम के साथ किया जा सकता है। रूस ने S-300PMU2 सिस्टम अजरबैजान, अल्जीरिया, ईरान, चीन और सीरिया को सप्लाई के लिए है। वहीं S-400 सिस्टम अल्जीरिया, बेलारूस, भारत, चीन और तुर्की को दिया गया है।

    रूस-भारत का एयर डिफेंस सौदा

    रूस फिलहाल भारत के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट पूरा कर रहा है। भारत और रूस में 2018 में पांच S-400 सिस्टम का सौदा हुआ। रूस को यह ऑर्डर 2023 तक पूरा करना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसमें से सिर्फ तीन डिलीवर किए गए हैं। डिलीवरी में देरी के बावजूद भारत अतिरिक्त सिस्टम खरीदने में भी गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है।

    भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान के साथ झड़प के दौरान रूसी एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया था। भारत ये सिस्टम चला रहा है और उसे इसके मिसाइल स्टॉक को भरने की जरूरत है। ऐसे में माना जा रहा है कि ये मिसाइलें भारत और ईरान जैसे रूसी ग्राहकों के स्टॉक को भरने के लिए थीं। इनका इस्तेमाल उसने यूक्रेन के खिलाफ किया है।

    ईरान ने बीते साल इजरायल से 12 दिन की जंग लड़ी। ऐसे में भारत के अलावा ईरान वह देश हो सकता है, जिसे ये मिसाइल स्टॉक मिलना हो। 2007 के कॉन्ट्रैक्ट के तहत ईरान को 2016 तक चार S-300PMU2 डिवीजन मिले थे। जून 2025 में इजरायली हमलों के बाद ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम की स्थिति साफ नहीं है।

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