रूस के पाकिस्तान को RD-93MA इंजन सप्लाई करने ने भारत में इस बहस को जन्म दिया है कि क्या उसका पारंपरिक सहयोगी मॉस्को इस्लामाबाद की तरफ जा रहा है। ओआरएफ की रिपोर्ट बताती है कि यह नया नहीं है क्योंकि रूसी मिलिट्री एक्सपर्ट लंबे समय से भारत के अलावा पाकिस्तान को भी हथियार सप्लाई करने पर जोर दे रहे हैं। इसी सोच का असर हालिया संबंधों पर दिखता है। हालांकि रूस को पाकिस्तान पर अभी भी बहुत भरोसा नहीं है।
Su-27 देने पर भी किया था विचार
पाकिस्तान और रूस का रक्षा सहयोग 1990 के दशक में भी बढ़ा था, जब मॉस्को ने इस्लामाबाद को Su-27 देने का फैसला लिया था। हालांकि बाद में भारत के एतराज पर यह डील रद्द कर दी गई। मिसाइलें, टैंक, स्टील्थ फ्रिगेट और आर्टिलरी गन खरीदने के पाकिस्तानी प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चले गए। हालिया वर्षों में दोनों में कई समझौते हो गए हैं।
हालिया वर्षों में भारत ने रूस के मिलिट्री हार्डवेयर पर अपनी निर्भरता कम की है तो दूसरी ओर मॉस्को ने पाकिस्तान को डिफेंस सप्लाई की तरफ ध्यान दिया है। हालांकि इसमें इस्लामाबाद की खरीदारी की सीमित क्षमता एक अड़चन है। वहीं पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी की अनिश्चित्ता भी मॉस्को की हथियार डील पर चिंता को गहरा करती रही है।
रूसी इंजन पर निर्भरता
चीन और पाकिस्तान अपने जेट के लिए रूस में बने इंजनों पर निर्भर हैं। RD-93 रूसी MiG-29 फाइटर जेट में इस्तेमाल होने वाले RD-33 इंजन का एक्सपोर्ट वेरिएंट है। इन इंजन को चीन और पाकिस्तान के JF-17 थंडर के लिए डिजाइन किया गया है। रूस ने 2007 से पाकिस्तान को RD-93 इंजन डिलीवर किए हैं।
रूस-पाकिस्तान के बीच बातचीत का एक और पहलू जॉइंट मिलिट्री ड्रिल है, जो अब रेगुलर बन गई है। द्रुज्बा काउंटर-टेररिज्म एक्सरसाइज का लेटेस्ट एडिशन 15 से 27 सितंबर 2025 तक रूस के सदर्न मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट में हुआ था। ये एक्सरसाइज सितंबर 2016 से दो सालों को छोड़कर रेगुलर तरीके से चल रही है।
रूस और पाकिस्तान ने फ्रेमवर्क में नेवी एक्सरसाइज को शामिल किया है। मार्च 2025 में रूस और पाकिस्तान की नेवी ने नॉर्थ अरब सागर में अरेबियन मानसून जॉइंट एक्सरसाइज की थी। इसका मकसद इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना और समुद्री सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए जॉइंट कमिटमेंट दिखाना था।













