आखिर किस तकनीक का इस्तेमाल
इंटरेस्टिंग इंजीनियरिंग की रिपोर्ट (ref.) के अनुसार, इकोपीस के रोबोट ऑटोनॉमस हैं। इन्हें लगातार काम करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका मतलब है कि एक बार पानी में उतरने के बाद ये उसकी सफाई में जुट जाते हैं। इन रोबोटों का नाम ईकोबोट (Ecobot) है। पानी में उतरने के बाद ये उसमें जमा काई यानी शैवाल को साफ करते हैं। इसके अलावा, पानी में मौजूद चिकनाई और दूसरी गंदगी को भी यह हटाते हैं। पानी को साफ करने के लिए इनमें स्टेनलेस-स्टील के माइक्रोफिल्टर लगे हैं। खास बात है कि गंदगी साफ करते-करते रोबोट जब खुद गंदे हो जाते हैं, तो ये खुद की सफाई भी कर लेते हैं।
पुराने तरीके अब काफी नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, पानी की सफाई के लिए ये रोबोट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी यानी एआई काे भी इस्तेमाल में लाते हैं। रोबोट मुख्य रूप से पानी में जमा काई को साफ करते हैं, क्योंकि उसकी वजह से पानी ज्यादा गंदा होता है। उसमें ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जो जलीय जीवों के लिए खतरा बनती है। कंपनी का कहना है कि जिस तरह से दुनिया में प्रदूषण बढ़ रहा है, उसने जल प्रदूषण का दायरा भी बढ़ाया है और शैवालों यानी काई की वजह से पूरी दुनिया में नदियां-तालाब संकट में है। काई हटाने के पारंपरिक तरीके अब काफी नहीं हैं और इसीलिए ऑटोनॉमस रोबोट को यह काम सौंपा गया है।
इस पूरे काम में एआई का क्या रोल
नदी-तालाबों से पानी की सफाई में एआई का अहम रोल है। जानकारी के अनुसार, रोबोट्स में लगे डेटा सेंसर एकसाथ मिलकर काम करते हैं। वो पानी में मौजूद गंदगी से जुड़ा डेटा सिस्टम में फीड करते हैं, जिसे एआई की मदद से फिल्टर किया जाता है। फिर तय होता है कि सफाई किस तरह से की जानी है। साउथ कोरिया के ये रोबोट सिंगापुर और यूएई में पहुंचने के बाद उम्मीद है कि दुनिया के बाकी देश में जल प्रदूषण से निपटने में रोबोट्स को इस्तेमाल में लाएंगे।













