स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर ने कहा कि अगर विक्रम भट्ट और उनके साथ पाए गए दोषियों को इस स्तर पर जमानत पर रिहा कर दिया जाता है, तो वो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। ‘इंदिरा आईवीएफ एंड फर्टिलिटी सेंटर’ के संस्थापक अजय मुर्डिया ने विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि एक फिल्म के नाम पर लिए गए पैसों का गलत इस्तेमाल किया गया है।
विक्रम भट्ट पर आरोप
आरोप है कि भट्ट परिवार ने अलग-अलग नामों से फर्जी बिल तैयार किए और शिकायतकर्ता से पैसे ट्रांसफर करवाए। फिल्म निर्माण के लिए निर्धारित यह पैसा कथित तौर पर उन्होंने अपने खातों में जमा कर लिया और उसका इस्तेमाल किया। नवंबर 2025 में मामला दर्ज किया गया तथा राजस्थान पुलिस 7 दिसंबर को विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को, उदयपुर निवासी दिनेश कटारिया और भट्ट के मैनेजर महबूब अंसारी को मुंबई से गिरफ्तार कर उदयपुर ले आई थी।
विक्रम भट्ट के वकील का दावा
अब विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये के फ्रॉड केस में जेल में ही रहना होगा। उनकी जमानत याचिका दूसरी बार कोर्ट ने खारिज कर दी है। इसके पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका भी खारिज कर दी थी। हालांकि फिल्ममेकर की टीम ने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया है। उनके वकील कमलेश देव ने दावा किया था कि पुलिस ने गलत की तरफ से की गई कार्रवाई सही नहीं। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, वकील ने कहा है कि जितनी भी पेमेंट हुई थीं, वो दोनों पक्षों ने जानकारी में हुई थी। कोई भी बिल फर्जी नहीं है।
विक्रम भट्ट 1.5 महीने से जेल में कैद
कोर्ट ने फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को पहले 9 दिसंबर को 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था और फिर 16 दिसंबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इनके वकील ने मेडिकल ग्राउंड्स पर अंतरिम जमानत की अपील की थी जिसे कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था। 28 दिसंबर को इनकी तरफ से फिर से जमानत की याचिका दायर की गई और कोर्ट ने उसे भी रिजेक्ट कर दिया था। फिलहाल इन्हें उदयपुर की सेंट्रल जेल में रखा गया है। 7 दिसंबर को इनकी गिरफ्तारी हुई थी।














