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  • वो कस्टम ऑफिसर, जिसने दाऊद समेत पूरे अंडरवर्ल्ड की नाक में कर दिया दम, कहानी लक्ष्मण दास अरोड़ा की

    कहते हैं इनाम कितना ही बड़ा क्यों न हो ईमान से छोटा ही रहता है। ये कहानी है ऐसे ही एक ईमानदार शख्स की। चेहरे पर मुस्कान लिए फैमिली मैन जैसा दिखने वाला शख्स। लेकिन तेवर ऐसे कि दाऊद इब्राहिम तो छोड़िए..पूरे अंडरवर्ल्ड की नाक में अकेले ही दम कर डाला। हालांकि इस ईमानदारी की


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    By Azad Hind Desk जनवरी 21, 2026
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    कहते हैं इनाम कितना ही बड़ा क्यों न हो ईमान से छोटा ही रहता है। ये कहानी है ऐसे ही एक ईमानदार शख्स की। चेहरे पर मुस्कान लिए फैमिली मैन जैसा दिखने वाला शख्स। लेकिन तेवर ऐसे कि दाऊद इब्राहिम तो छोड़िए..पूरे अंडरवर्ल्ड की नाक में अकेले ही दम कर डाला। हालांकि इस ईमानदारी की उन्हें बहुत ही बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। वो नाम है लक्ष्मण दास अरोड़ा।

    लेकिन आज अचानक इनकी याद क्यों आई? दरअसल बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी की नई वेब सीरिज ‘तस्करी’ इन दिनों खूब पसंद की जा रही है। सीरिज में कुछ कस्टम अधिकारी तस्करों की कमर तोड़ते दिख रहे हैं। इमरान हाशमी ने कस्‍टम ऑफ‍िसर अर्जुन मीणा का क‍िरदार न‍िभाया है। Reel Life में जिसे देखकर हम एक्साइटेड हो रहे हैं, वही काम Real Life में बखूबी करने वाले कस्टम अधिकारी थे लक्ष्मण दास अरोड़ा। इसी जांबाजी के लिए उन्हें ‘लीजेंड’ भी कहा जाता है। वो IRS ऑफिसर, जिन्होंने कस्टम के इतिहास में बहादुरी और ईमानदारी की नई मिसाल गढ़ दी।

    कौन थे लक्ष्मण दास अरोड़ा

    लक्ष्मण दास 1977 बैच के आईआरएस (Custom & Central Excise) अधिकारी थे। जामनगर यूनिट में वह असिस्टेंट डायरेक्टर रहे। बाद में उन्होंने मुंबई कस्टम की इंटेलिजेंस विंग में एडिशनल कमिश्नर ऑफ कस्टम का पद संभाला। बस यहीं से शुरू हुई कहानी देश-विदेश में बैठे गैंगस्टर्स, तस्करों और ड्रग्स माफिया के खात्मे की।

    250 करोड़ का सोना पकड़ा

    वो दौर था जब मुंबई में गैंगस्टर्स अपना दबदबा बनाने में लगे हुए थे। कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के चलते तस्कर बेखौफ होकर मुंबई एयरपोर्ट के जरिए तस्करी को अंजाम दिया जा रहा था। हर वो चीज, जिस पर मुनाफा कमाया जा सकता है, उसकी तस्करी की जा रही थी। फिर चाहे सोना-चांदी हो या फिर ड्रग्स। बस इसी सिंडिकेट को तोड़ने का जिम्मा उठाया लक्ष्मण सिंह अरोड़ा ने।

    खुद का खुफिया नेटवर्क खड़ा किया

    लक्ष्मण सिंह अरोड़ा ने अपना खुद का खुफिया नेटवर्क खड़ा किया। ये नेटवर्क जिनके ईमान को कोई भी इनाम डिगा नहीं सकता था। 1986 से 1992 के बीच एयरपोर्ट से उनकी नजर से बचे परिंदे का भी पर मारना मुश्किल हो गया था। उस दौरान इस टीम ने रिकॉर्ड 250 करोड़ रुपये का सोना-चांदी और ड्रग्स जब्त कर लिया था। ये कीमत उस समय की है जब सोने की कीमत लाखों में नहीं हजारों में ही थी। 1986 में 10 ग्राम सोना महज 2100 रुपये मिल रहा था जबकि 1992 तक इसकी कीमत बढ़कर 4400 के आसपास ही पहुंची थी। आज की कीमत में इसकी कीमत 9000 करोड़ के भी पार है।

    ड्रग सिंडिकेट पर जोरदार प्रहार

    यही नहीं लक्ष्मण दास अरोड़ा ने देश में फैलते नशे के कारोबार पर भी जोरदार हमला किया। मुंबई के जरिए देश में आने वाली नशीली दवा Mandrax की सबसे बड़ी खेप को उन्होंने जब्त कर लिया था। ये वो वक्त था, जब भारत इस नशीली दवा का हब बनता जा रहा था। अफ्रीकी देशों से बड़ी खेप भारत में भेजने की कोशिशें हो रही थीं। लेकिन कस्टम ऑफिसर्स ने इस पूरे सिंडिकेट को तबाह कर डाला था।

    मुंबई हमलों का अहम सुराग हाथ लगा

    देश में तस्करी रोकने की कोशिश में लक्ष्मण दास अरोड़ा के हाथ कुछ ऐसा लगा, जिसने दाऊद इब्राहिम को हिला डाला। 1992 मुंबई हमले में जो RDX इस्तेमाल हुआ था, वो मुंबई के तट तक कैसे आया, इसकी जानकारी उन्हें लग गई थी। उन्हें और उनकी टीम के हाथ इस पूरे तस्करी नेटवर्क की कुंडली लग गई थी। अंडरवर्ल्ड को डर सताने लगा कि जल्द ही मुंबई ब्लास्ट और तस्करी के पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो जाएगा।

    अंडरवर्ल्ड ने दे डाली सुपारी

    25 मार्च, 1993। यही वो तारीख थी, जिस दिन भारत ने अपना एक जाबांज ऑफिसर खो दिया। लक्ष्मण दास प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में थे। अंडरवर्ल्ड के शूटर्स ने उन्हें गोलियों से भून डाला। इस हत्या में दाऊद और बबलू श्रीवास्तव का हाथ बताया गया। हालांकि उनके हत्यारे को पकड़ने के लिए 2 दशकों का इंतजार करना पड़ा। साल 2013 में यूपी पुलिस ने अलीमुद्दीन उर्फ बाबा को उनकी हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। इस मामले में कुछ और नाम सामने आए।

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