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  • शी जिनपिंग का ‘एकीकरण’ वाला संदेश, क्या ताइवान के बहाने भारत को धमका रहा चीन?

    नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के मौके पर अपने देश को आर्थिक से लेकर सामरिक नीतियों पर संदेश दिया है। इस संदेश से ठीक पहले ताइवान के नजदीक चीन की मिलिट्री ड्रिल पूरी हुई है। राष्ट्र के नाम अपने मैसेज में जिनपिंग ने दो बातें ऐसी कही हैं, जो उसकी


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    By Azad Hind Desk जनवरी 1, 2026
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    नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के मौके पर अपने देश को आर्थिक से लेकर सामरिक नीतियों पर संदेश दिया है। इस संदेश से ठीक पहले ताइवान के नजदीक चीन की मिलिट्री ड्रिल पूरी हुई है। राष्ट्र के नाम अपने मैसेज में जिनपिंग ने दो बातें ऐसी कही हैं, जो उसकी खतरनाक विस्तारवादी नीति में खौफनाक इरादे की तरह नजर आ रहा है। इसमें उन्होंने दो शब्दों का इस्तेमाल किया है, जो महत्वपूर्ण हैं, एक ‘मदरलैंड’ या मातृभूमि और दूसरा ‘रीयूनिफिकेशन’ या एकीकरण। जिनपिंग की बातों में छिपे अहंकार से स्पष्ट है कि चीन की नापाक नजरें, कहीं न कहीं भारत के अरुणाचल प्रदेश पर भी अटकी पड़ी हैं।

    शी जिनपिंग ने क्या कहा है

    शी जिनपिंग ने नव वर्ष पर राष्ट्र के नाम शुभकामना संदेश में कहा कि ‘हमारी मातृभूमि का एकीकरण जो समय का एक ट्रेंड है, उसे रोका नहीं जा सकता।’ जिनपिंग का यह संदेश ताइवान के पास उसकी सेना के लाइवफायर ड्रिल खत्म होने के तुरंत बाद आया है। इससे पहले चाइनीज मिलिट्री ने जिस तरह से ताइवान के नजदीक समुद्री क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की, उसपर जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक ने आपत्ति जताई है। लेकिन, चीन को उसकी ऐसी आलोचना हजम नहीं हुई और उलटे उसने ही इन आपत्तियों को गैरजिम्मेदाराना ठहराने की कोशिश की है।

    अरुणाचल की ओर चीन की इशारा!

    चीन सिर्फ ताइवान को ही अपना मानकर उसपर दावा नहीं करता और आए दिन उसे डराने-धमकाने की कोशिश में नहीं लगा रहता। वह अरुणाचल प्रदेश को भी अपना क्षेत्र बताता है और इसे दक्षिण तिब्बत या जंगनम (Zangnan)कहकर बुलाता है। यही नहीं, आए दिन चीन अरुणाचल के अलग-अलग इलाकों के नाम बदलता रहता है और अपने नक्शे में घुसाता रहता है। यहां तक कि वह भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अरुणाचल जाने पर भी उछलता हुआ नजर आता है। ऐसे में जिनपिंग की धमकी को मात्र ताइवान तक सीमित मानकर निश्चिंत बैठे रहना भारी भूल साबित हो सकती है।

    अमेरिकी रिपोर्ट ने भी दी है चेतावनी

    हाल ही में एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ताइवान की तरह अरुणाचल प्रदेश में भी चीन की बहुत ही ज्यादा दिलचस्पी है। अमेरिकी रिपोर्ट में यहां तक आशंका जताई गई है कि भारत और चीन के संबंधों में यह मुद्दा बहुत बड़े टकराव की वजह बन सकता है। चीन के इस इरादे पर अमेरिका ने कहा है कि वह अरुणाचल प्रदेश को भारतीय क्षेत्र मानता है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के उस पार देखने की चीन के इरादे का सख्ती से विरोध करता है।

    अरुणाचल नहीं रहा तिब्बत का हिस्सा

    तथ्य यह है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत कहता है, जबकि भारत पूरी तरह से स्पष्ट कर चुका है कि यह हमारा अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। तथ्य यह भी है कि अरुणाचल प्रदेश कभी भी तिब्बत का हिस्सा नहीं था और 14वें दलाई लामा भी यह बात अनेकों बार स्पष्ट कर चुके हैं। तथ्य यह भी है कि तिब्बत भी चीन का नहीं है और उसने ताकत के बल पर उसपर कब्जा कर रखा है।

    1200 किलोमीटर की सीमा पर नजर

    अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया था कि हम चीन के साथ कोई सीमा भी नहीं साझा करते, हमारी सीमाएं तिब्बत से लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ‘मैप देखिए, सच तो यह है कि भारत से कोई भी राज्य सीधे चीन से सीमा साझा नहीं करता है। हम सिर्फ तिब्बत के साथ सीमा साझा करते हैं। 1950 में चीन ने आकर तिब्बत पर जबरदस्ती कब्जा किया, आधिकारिक रूप से जरूर अभी तिब्बत चीन के नियंत्रण में है, इसे हम नहीं ठुकरा सकते। लेकिन मूल रूप से हम तिब्बत के साथ सीमा साझा करते हैं। अरुणाचल में हम तीन अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। भूटान के साथ यह करीब 150 किलोमीटर का है, तिब्बत के साथ करीब 1200 किलोमीटर का है, जो देश में सबसे ज्यादा में से एक है और पूर्व में म्यांमार जो कि तकरीबन 550 किलोमीटर के आसपास है।’

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