ग्लोबल डेटा एंड एनालिटिक्स सर्विस प्रोवाइडर Kpler का कहना है कि पिछले कुछ साल से सऊदी अरब से भारत का क्रूड आयात रोजाना 6-7 लाख बैरल बना हुआ था। लेकिन फरवरी में यह करीब छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। फरवरी में रूस से तेल का आयात रोजाना करीब 10 लाख बैरल से अधिक रहा जबकि जनवरी में यह 11 लाख बैरल और दिसंबर में 12 लाख बैरल था।
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पश्चिम एशिया से सप्लाई
Kpler में लीड रिसर्च एनालिस्ट (रिफाइनिंग एंड मॉडलिंग) सुमित रितोलिया ने कहा कि पिछले दो-तीन महीनों से पश्चिम एशिया से भारत की तेल की सप्लाई बढ़ी है। इससे भारत के इम्पोर्ट बास्केट में गल्फ से आने वाले क्रूड की हिस्सेदारी बढ़ गई है। लेकिन इस महीने स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत का करीब 25 से 27 लाख बैरल तेल होर्मुज की खाड़ी में ट्रांजिट में है। यह तेल ईराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से आ रहा है।
पश्चिम एशिया में संकट से खाड़ी में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इस कारण भारतीय रिफाइनरी कंपनियां वैकल्पिक स्रोत की तलाश में है। रूस से खरीद बढ़ाई जा सकती है क्योंकि उसके कई जहाज अभी समुद्र में है जिन्हें तेजी से भारत की तरफ मोड़ा जा सकता है। भारत के पास कच्चे तेल की केवल 18 दिन की इंवेंट्री रह गई है। ऐसे में अगर ईरान संकट लंबा खिंचता है तो भारत की मुश्किल बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में भारत रूस से ज्यादा तेल खरीद सकता है।













