‘दुर्भाग्य से हमें दुष्ट पड़ोसी भी मिले हैं’
शुक्रवार को आईआईटी मद्रास में एक कार्यक्रम के दौरान भारत की नेबरहुड पॉलिसी पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ‘हमें विभिन्न तरह के पड़ोसियों का सौभाग्य मिला है। दुर्भाग्य से हमें दुष्ट पड़ोसी भी मिले हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर कोई देश जानबूझकर लगातार आतंकवाद में जुटा रहना चाहता है, तो हमें अपने लोगों की रक्षा करने का हक है और हम इसका इस्तेमाल करेंगे। हम अपने इन अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह से करेंगे, यह हमपर निर्भर है, हमसे कोई नहीं कह सकता कि हमें क्या करना चाहिए, क्या नहीं।’
‘आतंकवाद के साथ सद्भावना कैसी’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘कई साल पहले हमनें पानी साझा करने की व्यवस्था पर सहमति दी थी, क्योंकि इसके पीछे यह विचार था कि इससे सद्भावना का संदेश जाएगा। लेकिन, जब दशकों तक आतंकवाद चलेगा, तो अच्छी पड़ोसदारी भी नहीं रहेगी। पड़ोसी से अच्छे संबंध नहीं हैं, तो आपको उसका फायदा नहीं मिलता। आप यह नहीं कह सकते कि मेरे साथ पानी साझा कीजिए और हम आतंकवाद जारी रखेंगे।’
‘हमारे अधिकतर पड़ोसियों को समझ है’
एस जयशंकर ने यह भी कहा है कि भारत की नेबरहुड पॉलिसी कॉमन सेंस से तय होती है। अच्छे पड़ोसियों के साथ भारत निवेश करता है, मदद करता है और शेयर करता है, चाहे वह कोविड के समय वैक्सीन हो,यूक्रेन संघर्ष के दौरान दी गई ईंधन और खाने-पीने की सहायता हो या फिर श्रीलंका को उसके वित्तीय संकट के समय दी गई 4 बिलियन डॉलर की सहायता हो। उन्होंने कहा, ‘हमारे अधिकतर पड़ोसियों को यह समझ है कि भारत की ग्रोथ आज एक बढ़ती हुई धारा की तरह है। अगर भारत आगे बढ़ेगा, तो हमारे सभी पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगे।
पहलगाम हमले के बाद रुक सिंधु संधि
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके अगले ही दिन भारत ने कड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि पर ब्रेक लगा दिया था। भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता 1960 के दशक में हुआ था और तबसे लेकर पाकिस्तान इसका एक तरह से एकतरफा फायदा उठाता आ रहा था। लेकिन, जैसे ही संधि रुकी उसकी छटपटाहट शुरू हो गई। पाकिस्तान के हुक्कमरानों ने दुनिया भर में अपने आकाओं के सामने रोना शुरू कर दिया। लेकिन, भारत ने स्पष्ट कर दिया कि पानी और खून एकसाथ नहीं बहने दिया जा सकता।













