कनाडा के इतिहास की इस सबसे बड़ी लूट के किरदार 1-1 करके गिरफ्त में आते चले गए। अब सोमवार को एक और आरोपी को दबोच लिया गया है। इस शख्स का नाम है अरसलान चौधरी। लेकिन 2 अभी भी फरार हैं, जिनमें से एक पंजाब में कहीं छिपा बैठा है। इसका नाम है सिमरनप्रीत मनेसर। दरअसल यह डकैती 2023 में हुई थी। अब जाकर पुलिस को इस केस में कामयाबी मिली है। पुलिस के मुताबिक अरसलान चौधरी को टोरंटो इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। वो दुबई से यहां पहुंचा था। पुलिस की मानें तो चौधरी का फिक्स एड्रेस नहीं है।
कैसे उड़ाया था 400 किलो सोना
17 अप्रैल, 2023 में कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी डकैती हुई। एयरपोर्ट से करीब .9999 प्यूरिटी वाला 400 किलो सोना लेकर एक कार्गो जा रहा था। करीब 6600 सोने की ईंटें थीं। इसकी कीमत उस समय करीब 20 मिलियन डॉलर थी। इसके अलावा शिपमेंट में 25 लाख डॉलर विदेशी करेंसी भी थी। शिपमेंट तय जगह की बजाय किसी दूसरी ही जगह पर उतरा। लेकिन कुछ घंटों के बाद ही पूरा का पूरा शिपमेंट ही गायब हो गया। पूरे देश में हड़कंप मच गया। कनाडा ही नहीं बल्कि देश की सीमा से बाहर भी तलाश शुरू हुई। 10 लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया गया। इनमें अरसलान चौधरी और सिमरन प्रीत मनेसर भी शामिल थे।
आखिरी बार चंडीगढ़ में दिखा था सिमरन प्रीत
सिमरनप्रीत मनेसर एयर कनाडा में काम कर चुका था और एयरपोर्ट के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था। उस पर आरोप हैं कि उसी ने कार्गो की पहचान करने और उसे दूसरी जगह शिफ्ट कराने में मदद की थी। पिछले साल इसकी लोकेशन चंडीगढ़ मिली थी, जहां एक किराए के मकान में यह रहा था। कनाडा पुलिस इसके खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी कर चुकी है।
डकैती में कई भारतीयों के नाम
इस डकैती में कई भारतीयों के नाम शामिल हैं। इनमें से एक नाम है अर्चित ग्रोवर। ये भी पनेसर की तरह ब्राम्पटन का ही रहने वाला था। पिछले साल 2024 में इसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह शख्स भारत से यहां लौटा था। इसके अलावा एयर कनाडा में ही काम करने वाले परमपाल सिद्धू, अमित जलोटा, प्रसाद परमलिंगम, अली रजा, अहमद चौधरी। इसके अलावा एक किंग मैकलिन का भी नाम है। इन सभी को सलाखों के पीछे डाला जा चुका है।
क्या है Project24K
इस लूट को अंजाम देने वालों को गिरफ्तार करने के लिए कनाडा पुलिस ने Project24K शुरू किया था। इतनी बड़ी लूट के आरोपियों को पकड़ने के लिए दूसरे देश की पुलिस के साथ मिलकर ऑपरेशन चलाए गए। लुटेरों को ढूंढ-ढूंढकर निकाला गया। कनाडा पुलिस का साफ कहना है कि यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि दोषी कहीं भी छिप जाए, उसे ढूंढकर ही निकाल लेंगे।














