इसके अलावा AIM-120 AMRAAM मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों का प्रोडक्शन भी हर साल कम से कम 1,900 यूनिट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इन मिसाइलों का NATO और नॉन-NATO देशों में फाइटर एयरक्राफ्ट से इस्तेमाल किया जाता है। ये मिसाइलें NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम के अंदर इंटरसेप्टर के तौर पर भी काम करती हैं।
अमेरिका ने तेजी से मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?
रेथियॉन ने कहा है कि उसकी सबसे एडवांस सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल SM-6 का प्रोडक्शन भी तेजी से बढ़ाने का फैसला लिया गया है। SM-6, अमेरिका की सबसे घातक मिसाइलों में शामिल है और ये रूसी किंझल और जिरकॉन जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता रखती है। इसका सालाना प्रोडक्शन 500 तक करने का प्लान तैयार किया गया है। फिलहाल अमेरिका हर साल करीब 125 SM-6 मिसाइलों का उत्पादन करता है। यानि इसे चार गुना बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
इस फ्रेमवर्क में SM-3 ब्लॉक IIA इंटरसेप्टर के प्रोडक्शन के विस्तार का भी जिक्र किया गया है, हालांकि इसकी कोई खास मात्रा नहीं बताई गई है। इसके अलावा, रेथियॉन ने नए SM-3 ब्लॉक IIB वेरिएंट के प्रोडक्शन को तेजी से शुरू करने की योजना बनाई है। ये दोनों इंटरसेप्टर टाइप नाटो के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस आर्किटेक्चर का हिस्सा हैं, जो एजिस अशोर सिस्टम के एलिमेंट हैं। रेथियॉन के मुताबिक, लिस्टेड मिसाइल सिस्टम के प्रोडक्शन रेट में आम तौर पर दो से चार गुना बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। टॉमहॉक मिसाइलें खास तौर पर अलग दिखती हैं, जिनके प्रोडक्शन में बीस गुना बढ़ोतरी की योजना है।
यूक्रेन युद्ध में भी मिसाइलों का हो सकता है इस्तेमाल
अमेरिका की ये मिसाइलें यूक्रेन युद्ध के लिए भी जरूरी हैं। यूक्रेन की डिफेंस फोर्सेस NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम और F-16 फाइटर एयरक्राफ्ट, दोनों में AIM-120 मिसाइलों का इस्तेमाल करती हैं, और भविष्य में इन्हें ग्रिपेन फाइटर जेट्स में भी इंटीग्रेट किया जा सकता है। हालांकि अमेरिका अभी सीधे मिलिट्री मदद के तौर पर ये मिसाइलें सप्लाई नहीं कर रहा है, लेकिन दूसरे देश PURL पहल के तहत यूक्रेन के लिए जरूरी ऑर्डर दे रहे हैं। ये समझौते फ्रेमवर्क अरेंजमेंट हैं, जिनके तहत पेंटागन आने वाले सालों में धीरे-धीरे ऑर्डर देगा।













