सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले में क्या कहा
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि इनकम टैक्स कमिश्नर के पद पर प्रमोशन और आगे प्रमोशन की पूरी संभावना के बावजूद, उन्हें एक मनगढ़ंत मेमोरेंडम जारी किया गया। आखिरकार इसे हटा दिया गया। हालांकि, इस बहाने का सहारा लेकर याचिकाकर्ता को जबरन रिटायर कर दिया गया। वहीं जबरन रिटायरमेंट के आदेश को आखिरकार कोर्ट ने मुकदमे के पिछले दौर में 3 मार्च, 2023 के फैसले से रद्द कर दिया था। इसमें विभाग की ओर से हुई कार्रवाई के मनमाने और गलत तरीके पर कड़ी टिप्पणियां की गई थीं।
आरबीआई गवर्नर को फटकार क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व रेवेन्यू सेकेट्री, जो आरबीआई गवर्नर हैं, उनका नाम लिए बिना उन्हें ‘अधिकारी’ कहते हुए बेंच ने कहा कि हालांकि, यह देखते हुए कि ‘अधिकारी’ अब एक संवेदनशील पद पर हैं, हम इस पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका पर कोई टिप्पणी करने से बचते हैं, जिससे यह मुकदमा शुरू हुआ। बेंच ने इस मामले में अधिकारियों पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जो प्रमोद बजाज को देना होगा। इसने ITAT के सदस्यों के नए चयन का भी निर्देश दिया, जिसमें बजाज भी शामिल होंगे।
आईआरएस अफसर प्रमोद बजाज से जुड़ा है मामला
प्रमोद बजाज की I-T विभाग के साथ मुश्किलें 2014 में शुरू हुईं जब उन्होंने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के सदस्य (अकाउंटेंट) के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया। एक मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता वाली सर्च कम सिलेक्शन कमेटी ने उन्हें ऑल इंडिया रैंक वन पर रखा। हालांकि, विभाग ने उनकी अलग रह रही पत्नी के साथ चल रहे मुकदमे का हवाला देते हुए उन्हें इस पद पर नियुक्त नहीं किया।
कैसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के निर्देशों पर, डिपार्टमेंट की आपत्तियों को सर्च कम सिलेक्शन कमेटी के सामने रखा गया। समिति ने उन्हें खारिज कर दिया और उनकी ऑल इंडिया रैंक वन को बरकरार रखा। CAT के आदेश के खिलाफ अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। हार न मानते हुए और अपनी बात पर अड़े रहते हुए, डिपार्टमेंट ने प्रमोद बजाज के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू की और उन्हें संदिग्ध ईमानदारी वाले अधिकारियों की लिस्ट में डाल दिया।
इस कदम को भी CAT ने रद्द कर दिया। इस आदेश के खिलाफ अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। बाद में विभाग ने डिपार्टमेंटल कार्रवाई शुरू की और उन्हें जबरन रिटायर कर दिया, जबकि ACC ने उन्हें जॉइंट सेक्रेटरी के पद के लिए पैनल में शामिल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 3 मार्च, 2023 को एक कड़े फैसले में बजाज के खिलाफ कार्रवाई को रद्द कर दिया और जबरन रिटायरमेंट के आदेश को भी रद्द कर दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में क्या कहा
प्रमोद बजाज ने 2024 में रेवेन्यू सेक्रेटरी के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की और कोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने के लिए तलब किया। रेवेन्यू सेक्रेटरी ने 4 अगस्त, 2024 को बिना शर्त माफी मांगी और कोर्ट ने प्रमोद बजाज को सभी नतीजों वाले फायदे जारी करने का निर्देश दिया। उन्हें ITAT सदस्य के रूप में नियुक्त नहीं किया गया, बल्कि एक मौजूदा सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता वाली SCSC के सामने एक नए इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।













