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  • ‘सैटेलाइट इंटरनेट कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा फाइबर ब्रॉडबैंड का, कोई G इसे रिप्‍लेस नहीं कर सकता’

    Exclusive Interveiw: एलन मस्‍क के ‘स्‍टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट’ की चर्चा काफी समय से है। कहा जा रहा है कि यह फाइबर ब्रॉडबैंड इंटरनेट का विकल्‍प बन सकता है। लेकिन एक्‍सपर्ट ऐसा नहीं मानते। एक्‍साइटल (Excitel) ब्रॉडबैंड इंड‍िया के सीईओ और को-फाउंडर विवेक रैना का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट, फाइबर ब्रॉडबैंड का कुछ नहीं बिगाड़


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    By Azad Hind Desk फरवरी 10, 2026
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    Exclusive Interveiw: एलन मस्‍क के ‘स्‍टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट’ की चर्चा काफी समय से है। कहा जा रहा है कि यह फाइबर ब्रॉडबैंड इंटरनेट का विकल्‍प बन सकता है। लेकिन एक्‍सपर्ट ऐसा नहीं मानते। एक्‍साइटल (Excitel) ब्रॉडबैंड इंड‍िया के सीईओ और को-फाउंडर विवेक रैना का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट, फाइबर ब्रॉडबैंड का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। उन्‍होंने कहा कि गांव की चौपाल के लिए यह काम की चीज है, लेकिन कोई सोचे क‍ि इसे दिल्‍ली के शाहदरा और जनकपुरी जैसे इलाकों में लगाया जाएगा, यह गलत है। विवेक रैना ने आज़ाद हिन्द टेक को दिए एक्‍सक्‍लूस‍िव इंटरव्‍यू में देश के ब्रॉडबैंड इंटरनेट के वर्तमान हालात और भविष्‍य पर चर्चा की।

    गांव की चौपाल में लगाने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट ठीक है। पहाड़ों में बने रिजॉर्ट के लिए यह बेस्‍ट है। रेगिस्‍तान, समुद्र के लिए यह काम आएगा, लेकिन शहर के लिए नहीं बना है।

    ‘फाइबर ब्रॉडबैंड के सिर्फ 4 करोड़ कनेक्‍शन, यह बहुत छोटी संख्‍या’

    विवेक रैना ने कहा कि देश में वायरलाइन ब्रॉडबैंड यानी फाइबर इंटरनेट के कुल 4 करोड़ कनेक्‍शन हैं। यह बहुत छोटी संख्‍या है और इस सेक्‍टर में अभी काफी स्‍कोप है। उन्‍होंने कहा कि हमारे शहरों की आबादी ही बहुत ज्‍यादा है और अभी तो देश की ब्रॉडबैंड यात्रा शुरू ही हुई है। हमें साउथ कोरिया और पश्‍चिमी देशों की तरह भारत को फाइबर ब्रॉडबैंड से जोड़ना होगा। विवेक ने कहा कि सरकार का ध्‍यान अभी तक सिर्फ वायरलैस कनेक्‍ट‍िविटी यानी मोबाइल इंटरनेट पर था। सच्‍चाई यह है कि मोबाइल इंटरनेट से सारे काम नहीं किए जा सकते। कोविड के बाद से फाइबर ब्रॉडबैंड पर ध्‍यान देना शुरू किया गया है।

    रिचार्ज महंगा नहीं क‍िया, इससे मिली फाइबर ब्रॉडबैंड को सफलता

    विवेक ने कहा आज से 11 साल पहले बड़ी टेलिकॉम कंपनियां अपने फाइबर ब्रॉडबैंड को सिर्फ शहरों के स्‍ट्रक्‍चर्ड एरिया में उपलब्‍ध कराती थीं जैसे- दिल्‍ली में ग्रेटर कैलाश। उन्‍होंने कहा क‍ि 2015 में जब हमने जर्नी शुरू की तो अनस्‍ट्रक्‍चर्ड एरिया जैसे- शाहदरा को टार्गेट किया। हमने अपने प्राइस केबल टीवी के आसपास रखे और लोगों को बताया कि उन्‍हें क्‍या बेनिफ‍िट्स मिलेंगे। हमने सिर्फ 3 पैकेज रखे। तब हम 300 रुपये में 20Mbps स्‍पीड प्रतिमाह देते थे। आज उतनी ही कीमत में 200Mbps स्‍पीड दे रहे हैं। हमने रिचार्ज महंगा नहीं किया, लेकिन स्‍पीड बढ़ाई। ऐसे ही कदमों से फाइबर ब्रॉडबैंड को सफलता मिली है।

    कोई भी G, फाइबर ब्रॉडबैंड को रिप्‍लेस नहीं कर सकता। 6G जैसी तकनीक से निश्चित रूप से घर के बाद सुपरफास्‍ट इंटरनेट मिलेगा। बफ‍रिंग नहीं होगी। लेकिन घर के अंदर फाइबर इंटरनेट की उपयोगिता बनी रहेगी।

    चैलेंज हैं बहुत, 26% तक टैक्‍स देना पड़ता है

    विवेक ने वायरलाइन ब्रॉडबैंड को चैलेंजों पर भी बात की। उन्‍होंने कहा कि रेगुलेशन, खंभों की परमिशन जैसे चैलेंज सामने आते रहते हैं। उन्‍होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ समय पहले हैदराबाद में डिस्‍कॉम ने खंभों से सभी फाइबर ब्रॉडबैंड कंपनियों की तार काट दी। उससे शहर का इंटरनेट सि‍स्‍टम चरमरा गया। ऐसे मामलों में स्‍पष्‍टता की कमी रहती है। ये चैलेंज हर शहर और राज्‍य के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। उन्‍होंने कहा कि वायरलाइन के लिए हम 26 फीसदी तक टैक्‍स देते हैं, जिमसें 18 फीसदी जीएसटी ही है।

    गांव में प्राइवेट कंपनियां नहीं जाएंगी, सरकार को जाना होगा

    भारतनेट प्रोजेक्‍ट पर विवेक ने कहा कि यह अच्‍छा प्रोजेक्‍ट है। उन्‍होंने कहा कि गांवों में वायरलाइन को सरकार को ही ले जाना होगा। विवेक ने इसकी वजह भी समझाई। कहा कि फाइबर ब्रॉडबैंड जैसे प्रोडक्‍ट, मास पर चलते हैं। एक नेटवर्क पर आप चाहे 1 यूजर रखो या 1 लाख यूजर, खर्चा उतना ही आएगा। उन्‍होंने कहा कि मुझे ग्रेटर कैलाश जैसे मार्केट के बजाए शाहदरा जैसे एरिया में काम करना पसंद है, क्‍योंकि वहां यूजर्स हैं। गांवाें में आबादी कम है। घर दूर-दूर होते हैं। वहां प्राइवेट कंपनियां का जाना मुश्किल है। वह टाउन तक जा सकती हैं। गांव में नहीं।

    मोबाइल रिचार्ज की तरह क्‍या फाइबर ब्रॉडबैंड भी महंगा होगा?

    इस सवाल के जवाब पर विवेक ने कहा कि हमारे लिए प्राइस ज्‍यादा रखना संभव नहीं है, क्‍योंकि फ‍िर लोग सर्विस को इस्‍तेमाल ही नहीं करेंगे। हमने इस मामले में अलग स्‍ट्रैटिजी अपनाई है। पहले हम 500 रुपये में जो बेनिफ‍िट्स देते थे, उसे अब बढ़ा दिया है। हमने रिचार्ज महंगे नहीं किए।

    सैटेलाइट इंटरनेट महत्‍वपूर्ण, लेकिन फाइबर का विकल्‍प नहीं

    विवेक ने कहा कि भारत के लिए सैटेलाइट इंटरनेट महत्‍वपूर्ण है, लेकिन यह फाइबर ब्रॉडबैंड का‍ विकल्‍प नहीं बन सकता है। उन्‍होंने क‍हा कि गांव की चौपाल में लगाने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट ठीक है। पहाड़ों में बने रिजॉर्ट के लिए यह बेस्‍ट है। रेगिस्‍तान, समुद्र के लिए यह काम आएगा, लेकिन शहर के लिए नहीं बना है। उन्‍होंने कहा कि एक वक्‍त यह माना जा रहा था कि 5G मोबाइल नेटवर्क से फाइबर ब्रॉडबैंड की काफी जरूरत पूरी हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। घर में हाईस्‍पीड इंटरनेट के लिए तार चाहिए ही। उन्‍होंने कि सैटेलाइट इंटरनेट में स्‍पीड की चिंता नहीं है लेकिन इसकी लागत और मंथली रिचार्ज बहुत ज्‍यादा है और शहरों में लोगों को फाइबर ब्रॉडबैंड जैसे किफायती विकल्‍प मिल रहे हैं। विवेक ने कहा कि हमें तो सिर्फ तार मेंटेंट करने हैं। स्‍टारलिंक को सैटेलाइट मेंटेंट करने हैं, जिससे यह कभी सस्‍ता नहीं होने वाला।

    क्‍या 6G रिप्‍लेस कर देगा फाइबर ब्रॉडबैंड को?

    विवेक ने कहा कि कोई भी G, फाइबर ब्रॉडबैंड को रिप्‍लेस नहीं कर सकता। 6G जैसी तकनीक से निश्चित रूप से घर के बाद सुपरफास्‍ट इंटरनेट मिलेगा। बफ‍रिंग नहीं होगी। लेकिन घर के अंदर फाइबर इंटरनेट की उपयोगिता बनी रहेगी। फाइबर इंटरनेट में मिनिमम स्‍पीड की गारंटी दिए जाने के सवाल पर विवेक ने कहा कि हम गारंटी देते हैं कि तार में 200mbps स्‍पीड आएगी, लेकिन राउटर की गारंटी नहीं। क्‍योंकि वह कितना पावरफुल है, घर में वह कहां लगाया गया है और जिस डिवाइस में इंटरनेट चलाया जा रहा है, वह कितनी हाइटेक है, इन मामलों के कारण मिन‍िमम स्‍पीड की गारंटी देना तार्किक नहीं है।

    किस चीज ने फाइबर ब्रॉडबैंड मार्केट को दी मजबूती?

    विवेक ने कहा कि इसमें गैजेट्स का बड़ा रोल है। पहले ब्रॉडबैंड कंपनियां छोटे इलाकों में इसलिए नहीं जाती थीं, क्‍योंकि लोगों के पास गैजेट्स नहीं होते थे। आज हर घर में 4 से 5 मोबाइल होते हैं। हर व्‍यक्‍त‍ि पर्सनल कंटेंट स्‍ट्रीम करता है। स्‍मार्टफोन, लैपटॉप, स्‍मार्ट टीवी के मार्केट ने ब्रॉडबैंड इंटरनेट को घरों के लिए खोल दिया है।

    अगले 18 महीनों में फाइबर ब्रॉडबैंड कहां होगा?

    इस मार्केट में बहुत संभावनाएं हैं। आज भी करोड़ों घरों में फाइबर ब्रॉडबैंड का पहुंचना बाकी है। लेकिन कंपनियों को क्‍वॉलिटी पर ध्‍यान रखना होगा। जब हम लोगों को यह समझाने में कामयाब होंगे कि फाइबर ब्रॉडबैंड, मोबाइल इंटरनेट से कितना फायदेमंद है, तभी लोग इसे अपनाएंगे।

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