• National
  • ‘स्वदेशी’ राफेल पर 39 बिलियन का दांव क्यों? रणक्षेत्र में दुश्मन हो सामने तो भारत को फ्रांस का मुंह न देखना पड़े

    नई दिल्ली: वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भारत फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील करने वाला है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस डील पर मुहर लग सकती है। कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि 38 बिलियन डॉलर की लागत से हो रही इस डिफेंस


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भारत फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील करने वाला है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान इस डील पर मुहर लग सकती है। कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि 38 बिलियन डॉलर की लागत से हो रही इस डिफेंस डील में सबसे अहम शर्त यह है कि 80 प्रतिशत राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।

    भारत की ओर से इस डील में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, इसके लिए फ्रांसीसी अधिकारियों से बातचीत भी चल रही है। एनएनआई के सूत्रों के अनुसार, विमानों की सेवाक्षमता को बढ़ाने के लिए भारत में ही रखरखाव, मरम्मत और एमआरओ सुविधा स्थापित करने की योजना है। इससे विमानों के रखरखाव, अपडेशन समेत अन्य कार्यों के लिए भारत को फ्रांस की ओर नहीं देखना होगा।

    भारतीय कंपनी को मिल सकता है ऑर्डर का ठेका

    संभावना जताई जा रही है कि राफेल विमान के पुर्जों का भारत में निर्माण शुरू होने क बाद फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन निर्यात ऑर्डर के लिए किसी भारतीय कंपनी का इस्तेमाल करे। इसके साथ ही राफेल और अन्य डसॉल्ट विमानों का संचालन करने वाले देशों के लिए भारतीय सुविधाओं को एमआरओ केंद्र के रूप में पेश कर सकती है। हाल में ही फ्रांस की एयरोस्पेस और डिफेंस की बड़ी कंपनी थेल्स ने राफेल फाइटर जेट में इस्तेमाल होने (Active Electronically Scanned Array-AESA) रडार का महत्वपूर्ण पार्ट बनाने का ठेका एक भारतीय कंपनी को सौंपा है।

    वायुसेना के लिए खरीदे जा रहे इन 114 लड़ाकू विमानों की डील में आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशीकरण को ध्यान में रखा गया है। इसी के तहत सरकार चाहती है कि राफेल विमान के निर्माण में उपयोग होने वाले अधिकतम सामान का निर्माण भारत में ही हो। इसके पीछे कई अहम कारण हैं। जिसमें विमानों की मरम्मत देश में होने से समय की बचत होगी और लागत में भी कमी आएगी। इसके अलावा युद्ध के समय भारत के पास उसके अधिकतम विमान मौजूद रहेंगे। साथ ही इसमें फ्रांस का सीधे तौर पर हस्तक्षेप होने पर युद्ध के समय फ्रांस किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बना सकेगा।

    इसके इतर अमेरिका अपनी डील में शर्त रखता है कि युद्ध के समय वह जिस देश के खिलाफ फाइटर जेट के उपयोग की मनाही करेगा तो उसे मानना पड़ेगा। ऐसा न करने पर सॉफ्टवेयर में अपडेट कर वह कई किलोमीटर दूर से ही लड़ाकू विमान को निष्क्रिय कर सकता है। इसलिए कुछ लोग इसे भारत सरकार का यह मास्टर स्ट्रोक मान रहे हैं।

    नौ सेना के लिए 24 विमानों का अनुबंध

    वहीं भारतीय वायुसेना के लिए 114 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अभी रक्षा अधिग्रहण परिषद की औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है। मंजूरी मिलने के बाद कीमतों पर बातचीत होगी और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाएगी। पिछले साल भारत ने नौसेना के लिए 24 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस से अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे।

    मौजूदा समय में राफेल विमान भारतीय वायुसेना की ताकत को मजबूत करने के लिए उपयुक्त पाया गया है। इसलिए फ्रांस के साथ इसके अपग्रेड वर्जन की खरीद को लेकर बातचीत चल रही है। क्योंकि इसकी उपयोग क्षमता 90 प्रतिशत तक है, जो कि अमेरिकी F-35 समेत दुनिया के कई देशों के लड़ाकू विमान से काफी बेहतर है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।