हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल पहली झलक
भारतीय नौ सेना के लिए डीआरडीओ की ओर से विकसित हो रही लॉन्ग रेंज एंटी शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM missiles) की रेंज अभी 1,500 किलो मीटर है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी। गणतंत्र दिवस के मौके पर इसके परेड का हिस्सा बनने से रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता दुनिया देख सकेगी। न्यूज एजेंसी एएनआई से इसके प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए प्रसाद गौड़ ने कहा कि डीआरडीओ हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिलाइल टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।
नेवी के लिए बनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल
डीआरडीओ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा, ‘डीआरडीओ इस मिसाइल को इंडियन नेवी की जरूरतों के लिए विकसित कर रहा है। इसका मूल फायद ये है कि यह हाइपरसोनिक है, इसलिए दुश्मन के रडार न तो इस पकड़ सकते हैं, न ही ट्रैक कर सकते हैं।’ इसकी रेंज करीब 1,500 किलोमीटर है और यह अलग-अलग तरह की पेलोड लेकर दुश्मन की तबाही वाले मिशन पर निकल सकती है; और फिर समुद्री जहाजों पर तैनात हथियारों (warheads) को नष्ट कर सकती है।
हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल की विशेषताएं
हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल हाइपरसोनिक स्पीड और हाई एयरोडिनामिक क्षमता के साथ आगे बढ़ सकती है। समुद्र में इसकी वजह से भारत की क्षमता बहुत बढ़ जाएगी। डीआरडीओ इस समय हाइपरसोनिक ग्लाइड टेक्नोलॉजी और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। यह मिसाइल 1,500 किलोमीटर दूर के टारगेट को बहुत ही कम यानी 15 मिनट से भी कम समय में तबाह कर सकती है।
सभी तरह के युद्धपोतों को नष्ट करने में सक्षम
डीआरडीओ के अनुसार हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल समुद्र में मौजूद दुश्मन के सभी तरह के युद्धपोतों को नष्ट करने में सक्षम होगी। हाइपरसोनिक मिसाइल ही भारत का भविष्य है और डीआरडीओ इसकी क्षमता को 3,000 किलो मीटर से 3,500 किलो मीटर रेंज तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। डीआरडीओ का एडवांस्ड लैब टेक्नोलॉजी अभी हाइपरसोनिक ग्लाइड टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है।













