भारत: 16 साल तक के बच्चों पर रोक की वकालत
इससे पहले बीते साल दिसंबर में मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने कहा कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने यह बात नाबालिगों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफिक कंटेंट आसानी से मिल जाने के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। याचिकाकर्ता एस विजयकुमार के वकील केपीएस पलानीवेल राजन ने ऑस्ट्रेलिया के नए कानून का हवाला दिया था।
फ्रांस में हाईस्कूलों में मोबाइल फोन पर भी बैन
पूरे यूरोप में सोशल प्लेटफॉर्म पर न्यूनतम आयु सीमा की मांग जोर पकड़ रही है। फ्रांस के इस विधेयक में हाई स्कूलों में मोबाइल फोन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है और इसे सोमवार देर रात 130-21 मतों से पारित किया गया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस विधेयक को जल्द पारित करने का अनुरोध किया था, और अब इसे आने वाले हफ्तों में सीनेट में बहस के लिए भेजा जाएगा।
मैक्रों ने इस पाबंदी को लेकर दी ये दलील
मैक्रों ने 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर कहा कि यही वैज्ञानिक अनुशंसा है और यही फ्रांसीसी जनता की भारी मांग है। उन्होंने कहा-हमारे बच्चों का दिमाग बिकने के लिए नहीं है। न तो अमेरिकी प्लेटफॉर्म को और न ही चीनी नेटवर्क को। क्योंकि उनके सपनों को एल्गोरिदम द्वारा निर्देशित नहीं किया जाना चाहिए।
वामपंथी आलोचकों ने कहा-यह स्वतंत्रता का हनन
विभाजित नेशनल असेंबली में यह मुद्दा उन कुछ मुद्दों में से एक है जिसे व्यापक समर्थन प्राप्त है, हालांकि वामपंथी आलोचकों ने विधेयक के कुछ तत्वों को नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है। संसद भंग करने के उनके निर्णय के बाद से राजनीतिक रूप से कमजोर हुए मैक्रोन ने फ्रांस को एक लंबे संकट में धकेल दिया है, लेकिन उन्होंने इस प्रतिबंध का जोरदार समर्थन किया है, जो अगले साल पद छोड़ने से पहले उनके नेतृत्व में अपनाए जाने वाले अंतिम प्रमुख उपायों में से एक हो सकता है।
आंध्र भी लगाएगा बच्चों के सोशल मीडिया पर बैन !
आंध्र प्रदेश सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर बुधवार को मंत्रियों के एक समूह (जीओएम) द्वारा विचार-विमर्श करने जा रही है। राज्य के सूचना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश की अध्यक्षता में आंध्र प्रदेश का सोशल मीडिया पर गठित जीओएम बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के फायदे और नुकसान पर चर्चा करने के लिए बैठक करेगा।
सोशल मीडिया का बच्चों पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव
सूत्रों के अनुसार, सरकारी अधिकारियों ने दुनिया भर में सोशल मीडिया प्रतिबंधों के विभिन्न मॉडलों का अध्ययन किया है और बुधवार को होने वाली चर्चा के लिए एक नोट तैयार किया है। इस नोट में बच्चों की बढ़ती एकाग्रता और साथियों के साथ बेहतर शारीरिक संपर्क को प्रतिबंध के पक्ष में तर्क के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। नोट में डिजिटल क्लिफ के मुद्दे पर भी चिंता जताई गई है, जिसे 16 वर्ष की आयु में अचानक सोशल मीडिया के संपर्क में आने के भावनात्मक और सामाजिक प्रभाव के रूप में परिभाषित किया गया है। पिछले साल अक्टूबर में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के महिला परिवार के सदस्यों की मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरों के प्रसार के बाद सोशल मीडिया के लिए एक नियामक ढांचा तैयार करने के लिए जीओएम का गठन किया गया था।
ऑस्ट्रेलिया भी लगा चुका है यह बैन
ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के बाद, GoM के दायरे का विस्तार किया गया। इस कदम का उद्देश्य नाबालिगों को ऑनलाइन नुकसान, साइबरबुलिंग और व्यसनकारी एल्गोरिदम से बचाना है। आंध्र प्रदेश भारत का पहला राज्य है जो इस तरह के सोशल मीडिया प्रतिबंध पर विचार कर रहा है। गोवा भी अब इसी तरह के प्रतिबंध पर चर्चा कर रहा है।













