वार्ड 250 न्यूक्लियर रिएक्टर क्या है?
वार्ड 250 एक कॉम्पैक्ट न्यूक्लियर रिएक्टर है, जो लगभग एक बड़ी वैन के साइज का है। अपनी पूरी क्षमता पर यह रिएक्टर लगभग 5 मेगावाट की बिजली बना सकता है, जो लगभग 5000 घरों को उजाला करने के लिए काफी है। इस साल के आखिर में यह मशीन 100 किलोवाट की क्षमता पर काम शुरू करेगी और धीरे-धीरे 250 किलोवाट तक अपनी उत्पादकता बढ़ाएगी। ऐसे ही धीरे-धीरे यह अपने पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगी।
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वार्ड 250 न्यूक्लियर रिएक्टर की खूबी क्या है?
इस न्यूक्लियर रिएक्टर का सबसे बड़ी खूबी इसकी डिजाइन है, जो इसे पारंपरिक रिएक्टर से अलग बनाता है। यह रिएक्टर TRISO (TRi-स्ट्रक्चरल ISOtropic पार्टिकल) फ्यूल का इस्तेमाल करता है। यह एक ऐसा फ्यूल है जिसमें यूरेनियम के दाने सिरेमिक मटीरियल की कई परतों के अंदर लिपटे होते हैं और यह पानी के बजाय हीलियम से खुद को ठंडा करता है। इससे यह पुराने रिएक्टर डिजाइन की तुलना में ऑपरेट करने में ज्यादा सुरक्षित, खराब होने में कम मुश्किल और ज्यादा तापमान पर चलने में सक्षम हो जाता है।
माइक्रोरिएक्टर भारत के लिए क्यों जरूरी?
भारत एक विविध भौगोलिक क्षेत्र वाला देश है। इसमें कहीं ऊंचे पहाड़ तो कहीं रेगिस्तान और कहीं दलदली इलाका है। ऐसे में हर जगह पावर ग्रिड से बिजली पहुंचाना काफी मुश्किल काम हो जाता है। वहीं, माइक्रोरिएक्टर को किसी पावर ग्रिड में प्लग करने की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में यह रेगिस्तान, पहाड़ों या दलदली इलाके में भी आसानी से बिजली पहुंचा सकता है, वो भी बिना किसी रिफ्यूलिंग की चिंता के। इस माइक्रोरिएक्टर का इस्तेमाल दूरदराज और कठिन भौगोलिक परिस्थिति में स्थित मिलिट्री बेस को भी बिजली सप्लाई करने के लिए किया जा सकता है, जहां रिफ्यूलिंग कॉन्वॉय या पेट्रोल-डीजल की सप्लाई चेन दुश्मन का आसान निशाना बन सकती है।













