बिजनेस टुडे के मुताबिक लगभग 57 डॉलर प्रति बैरल की मौजूदा कीमतों पर वेनेजुएला के तेल भंडार का मूल्य लगभग 17.3 ट्रिलियन डॉलर (करीब 1530 लाख करोड़ रुपये) है। यानी अब इस खजाने पर अघोषित रूप से अमेरिका का कब्जा हो जाएगा। अगर इसे बाजार दर से आधे पर भी बेचा जाए तो भी यह भंडार लगभग 8.7 ट्रिलियन डॉलर का होगा। यह राशि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के हर देश के पूरे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से ज्यादा है।
वेनेजुएला पर कब्जा कर पैसा कमाएगा अमेरिका, चीन को करेगा तेल की सप्लाई, भारत पर क्या असर?
वेनेजुएला के तेल कारोबार में अमेरिका
शनिवार को ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका की बड़ी ऊर्जा कंपनियां वेनेजुएला के खराब हो चुके तेल ढांचे को ठीक करने और उत्पादन फिर से शुरू करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेंगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां देश के लिए पैसा कमाना शुरू करेंगी। कहा, ‘हम तेल के कारोबार में हैं। हम इसे उन्हें बेचेंगे।’ ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल की ‘बड़ी मात्रा’ चीन समेत दूसरे देशों को बेचेगा।
कैसे बदला नक्शा?
वेनेजुएला का तेल हमेशा से उसकी सबसे बड़ी संपत्ति और उसकी सबसे गहरी कमजोरी दोनों रहा है। अगर अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल उत्पादन को बहाल करने में सफल होती हैं, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रवाह से OPEC की गतिशीलता बदल सकती है, कीमतों पर दबाव पड़ सकता है और सऊदी अरब और रूस जैसे प्रमुख उत्पादकों की रणनीतिक गणना बदल सकती है।
ऊर्जा के अलावा, यह संपत्ति बहुत बड़ी है। खरबों डॉलर का तेल भंडार अब अमेरिका की रणनीतिक योजनाओं का अहम हिस्सा बन गया है। जैसा कि ट्रंप ने कहा, ‘हम तेल का प्रवाह शुरू करेंगे।’ यह वेनेजुएला के लिए एक नया अध्याय हो सकता है, जो अमेरिका के कंट्रोल में होगा। यह दुनिया की शक्ति के संतुलन को भी बदल सकता है।













